रुद्रपुर। अब सीबीएसई बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाएं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जांची जाएंगी। डिजिटल मूल्यांकन में शुद्धता 95 फीसदी तो शिक्षकों की ओर से किए गए मूल्यांकन में यह 92 फीसदी है। यानी एआई से जांच में गलती न के बराबर होगी।
सीबीएसई ने इसी बार की 10वीं बोर्ड परीक्षा का डिजिटल मूल्यांकन करवाने की घोषणा कर दी है। अभी आईआईटी, एनआईटी, समेत कई शिक्षण संस्थान भी इसे लागू करने से पहले छोटे-छोटे ग्रुप में परीक्षाओं के डिजिटल मूल्यांकन की परख कर रहे हैं।
सीबीएसई की जिला कॉर्डिनेटर भावना बहनोद ने बताया कि आईआईआईटी बेंगलूरू ने तो एआई से डिजिटल मूल्यांकन को लागू भी कर दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) भी जेईई मेन, नीट, सीयूईटी समेत अन्य राष्ट्रीय दाखिला व अन्य परीक्षाओं का डिजिटल मूल्यांकन करा रहा है। इसका मकसद गलतियों को पकड़ना और सही उत्तर पर अंक देना है। एआई के दौर में एक वर्ग ने इसे शिक्षकों की नौकरी को खतरा बताया तो दूसरे वर्ग ने इसे सराहा भी है। उन्होंने बताया कि एआई गंदी लिखावट को भी अच्छी तरह समझ सकता है। इससे छात्रों को सबसे अधिक लाभ होगा। पहले जिन छात्रों को लिखावट साफ और अच्छी होती थी, उन्हें बिना किसी दिक्कत के अच्छे अंक मिल जाते थे। मगर, जिन छात्रों की लिखावट अच्छी नहीं होती थी, अधिकतर शिक्षकों को उनका उत्तर समझ नहीं आता था।
कुछ शिक्षक, लिखावट और उत्तर के अलग तरीके से लिखने के बाद भी अच्छे अंक दे देते हैं। कुछ शिक्षक गंदी लिखावट व अलग तरह से उत्तर लिखने पर अंक काट देते थे। अब एआई से मूल्यांकन होगा तो लिखावट और शिक्षक का बिहेवियर मायने नहीं रहेगा, क्योंकि गंदी लिखावट और उत्तर को अलग तरीके से लिखने के बाद भी एआई उसको समझेगा और अच्छे अंक देगा।