रुद्रपुर। इन दिनों एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक जानकारियां तेजी से फैल रही हैं। कुछ पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह वैक्सीन लगवाने से बालिकाएं भविष्य में इन्फर्टाइल (बांझ) हो सकती हैं या अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बता रहे हैं।
एचपीवी महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। देश में लंबे समय से सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। इसी खतरे को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 28 फरवरी से एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है जिसके तहत पात्र बालिकाओं को यह वैक्सीन निशुल्क लगाई जा रही है।
कोट
एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे बांझपन होने की बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इससे किसी तरह का खतरा नहीं है। - डॉ. उषा रावत, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर अभिभावक ध्यान न दें और अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं। - डॉ. डीपी सिंह, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
इस वैक्सीन से बालिकाओं में बांझपन होने या गंभीर बीमारियां होने जैसी बातें पूरी तरह भ्रामक हैं। एचपीवी संक्रमण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण होता है और यह टीका उसी संक्रमण से बचाव के लिए लगाया जाता है। - डॉ. अनुपमा फुटेला, स्त्री रोग विशेषज्ञ
14 वर्ष की बेटियों को सप्ताह में चार दिन लगेगा एचपीवी टीका
जसपुर। केंद्र सरकार ने 14 वर्ष की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए पहली बार राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जसपुर के सरकारी अस्पताल में बेटियों को टीका लगाया जाएगा। सीएमएस डॉ. धीरेंद्र मोहन गहलोत ने बताया कि अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के कक्ष संख्या चार में मुफ्त टीका लगाए जाने की व्यवस्था की गई है। बुधवार और शनिवार को छोड़ कर शेष दिनों में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक 15 वर्ष से कम आयु की बेटियां टीका लगवा सकती हैं। रविवार के दिन अवकाश रहेगा। उन्होंने इस उम्र की बेटियों से अधिक से अधिक संख्या में टीकाकरण अभियान में प्रतिभाग करने का आह्वान कर अभिभावकों से जागरूक रहने की अपील की। संवाद