पंतनगर। वन विभाग की ओर से डेढ़ साल से बिल जमा नहीं करने पर कटे कनेक्शन के चलते शुक्रवार नौ से दो बजे तक इमलीघाट गेट से खनिज की निकासी ठप रही। इससे सैकड़ों ट्रैक्टर स्वामी, मजदूर हलकान हुए। मीडिया को भनक लगते ही अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था कर निकासी शुरू करवाई।
शांतिपुरी नंबर-तीन स्थित गौला नदी वन विभाग के अधीन है। इसमें उप खनिज खनन के लिए विभाग ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार वन निगम को अधिकृत किया है। निगम ने उपखनिज निकालकर इमलीघाट गेट से निकलने पर तौल के लिए स्थानीय व्यक्ति को ठेका दिया है। बैरियर पर वन निगम और अधिकृत ठेकेदार के कर्मचारी सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कांटे पर उपखनिज का वजन करते हैं।
कांटा संचालित करने और प्रकाश व्यवस्था आदि के लिए विद्युत विभाग ने वन विभाग और वन निगम को अलग-अलग विद्युत कनेक्शन दिया है। वर्तमान में वन विभाग पर विद्युत बिल का लगभग 30 हजार रुपये बकाया है। इसके चलते विद्युत विभाग ने लगभग एक माह पूर्व कनेक्शन काट दिया था। इसके बाद वन विभाग ने बिल नहीं जमा किया और बगैर अनुमति वन निगम के मीटर से कटिया डालकर अपना काम चलाना शुरू कर दिया।
मामले की जानकारी होने पर शुक्रवार सुबह नौ बजे निगम ने अपने कर्मियों से वन विभाग को विद्युत आपूर्ति देने के लिए मना कर दिया। इसके बाद नौ बजे तक इन्वर्टर चला। फिर विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर कांटे पर वाहनों के वजन की प्रक्रिया ठप हो गई, जिसके चलते गौला नदी में खनिज लादने गए सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्राॅली और मजदूरों की दिहाड़ी भी फंस गई। दोपहर दो बजे अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था कर निकासी शुरू करवाई।
वन विभाग लेता है प्रति क्विंटल 22 रुपये राॅयल्टी
खनन निकासी के लिए लगभग 450 ट्रैक्टर-ट्राली पंजीकृत हैं। प्रत्येक ट्राली में औसतन 57 से 59 क्विंटल खनिज और ट्रैक्टर प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाता हैं। वन विभाग प्रति क्विंटल 22 रुपये राॅयल्टी वसूलता है, जिससे उसे प्रतिदिन लगभग पौने छह लाख रुपये का राजस्व मिलता है। इसके बावजूद विभाग विद्युत बिल जमा करने में आनाकानी कर रहा है।
विभाग ने यह की है वैकल्पिक व्यवस्था
इस दौरान अधिकारियों ने मातहतों को मौके पर भेजा और बिना अनुमति पुनः निगम के मीटर में कटिया डालकर निकासी शुरू करवाई, लेकिन विद्युत बिल जमा करवाने की जहमत नहीं उठाई। सूत्रों के अनुसार निगम ने अपने मीटर में कटिया डालने दी, तो उसका भी कनेक्शन कट सकता है।
अब तक ठेकेदार ने भरा विद्युत बिल
वन विभाग की लापरवाही और शोषण का आलम यह है कि फंड आने पर पूरा भुगतान कर देने का प्रलोभन देकर तौल ठेकेदार से सालों से विद्युत बिल भरवाया जाता रहा है। ठेकेदार के डेढ़ साल से बिल नहीं जमा करने पर भी अधिकारियों ने सुध नहीं ली। ठेकेदार की उसके कर्मियों पर सख्ती के बाद निगम के मीटर में कटिया डालकर काम चलाने की जुगत पर सालों से पड़ा पर्दा उठ गया।
करोड़ों का राजस्व वसूली करने वाला विभाग खुद ही विद्युत चोरी से कांटा संचालित कर रहा है। इसका खामियाजा नदी में फंस कर हम वाहन स्वामियों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग को गेट पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं करनी चाहिए।
-कविंदर कोरंगा, यूनियन अध्यक्ष इमली घाट वाहन।
विभाग के पास फंड की कमी होने के कारण बिल जमा नहीं हो पाया। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। जैसे ही फंड की व्यवस्था होगी, विद्युत संयोजन फिर से जोड़ दिया जाएगा।
- चंदन सिंह अधिकारी, रेंजर गौला।