एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल प्रबंध समिति की बैठक में प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों में दवाइयों, चिकित्सकीय उपकरणों और केमिकल्स खरीद के प्रस्ताव न होने पर जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव भड़क उठे। उन्होंने चिकित्साधिकारियों को फटकार लगाते हुए अस्पताल में प्रतिमाह तीस हजार रुपये की दवाइयों की खरीद के लिए एसडीएम, सीएमएस और कोषाधिकारी की समिति गठन किया।
चिकित्सालय कार्यालय में शुक्रवार को डीएम डा. आशीष श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बताया कि समिति के पास वित्त वर्ष 2015-16 का 6078987 बकाया था। एक अप्रैल 2016 से 20 जुलाई तक विभिन्न मदों से 6689294 रुपया समिति खाते में जमा हुआ। जबकि इसी अवधि में विभिन्न मदों में 5342021 रुपया खर्च हो गया।
इस मौके पर प्रबंधकों की ओर से चिकित्सालय में शौचालय, ओपीडी के पास मिट्टी भरान और इंटर लाकिंग के लिए 7.65 लाख, विभिन्न स्थानों पर जाली शीशे और मरम्मत के लिए 1.21लाख स्वीकृत करने के अलावा आवासीय परिसर में सीसी मार्ग का निर्माण, क्षतिग्रस्त चाहर दिवारी की मरम्मत, ब्लड बैंक की मरम्मत और रंगाई पुताई, महिला पुरूष वार्डो में इनवर्टर लगाने, फैक्स मशीन खरीदने, जनरेटर की मरम्मत करने आदि मांगे रखी गई।
डीएम ने इनमें अधिकतर मांगे विधिवत रूप से प्रस्तुत न किए जाने पर नाराजगी जताई। बैठक में ब्लड बैंक के लिए एक संविदा कर्मी तैनात करने, लेवर रूम के पास आशाओं केे लिए कमरा बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। अस्पताल में दवाई खरीदने के लिए सीएमएस और एसडीएम व कोषाधिकारी की एक समिति बनाई गई। बताया गया कि समिति हर महीने 30 हजार तक की दवाईयों खरीदेगी। बैठक में डाक्टरों की ओर से पर्चियों में दवाईयां ब्रांड नाम से लिखे जाने पर भी नाराजगी जताई गई।
बैठक में डीएम ने मरीजों के लिए खाना बनाने की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूह को देनेे की घोषणा की है। विधायक हरभजन सिंह चीमा ने कहा कि अस्पताल से रोगियों को गुणवत्तायुक्त दवाईयां दी जानी चाहिए। जरूरी उपकरण, साजो सामान की खरीद की जाय।
बैठक के बाद डीएम ने अम्मा भोजनालय के लिए अस्पताल परिसर में कमरे देखे। एसडीएम दयानंद सरस्वती को इसकी तत्काल व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया। बैठक में मेयर ऊषा चौधरी, सीएमओ डा. एचसी जोशी, सीएमएस डा. वीके टम्टा, डा. मनु पांडे, डा. मदन मोहन, संदीप सहगल आदि थे।