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Udham Singh Nagar News: चाहा था नामी ब्रांड का शोरूम हो अपना 14.94 लाख ठगी से चकनाचूर हुआ सपना

Sun, 11 May 2025 01:21 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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चार किस्तों में एनईएफटी के माध्यम से कंपनी का खाता समझ कर पैसे किए ट्रांसफर
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एक किस्त में भी कंपनी की सच्चाई जानने की नहीं उठाई जहमत
संवाद न्यूज एजेंसी
जसपुर। शोरूम खोलने की चाहत में एक युवक ने 14.94 लाख रुपये गंवा दिए। चार किस्तों में युवक ने एनईएफटी के माध्यम से पैसों को कंपनी का खाता समझकर ट्रांसफर किया, लेकिन एक बार भी कंपनी की सच्चाई जानने की जहमत नहीं उठाई। पांचवीं किस्त जमा करने पर एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

भूतपुरी रोड निवासी विदुश गोयल ने पुलिस को बताया कि वे टाटा जूडियो का शोरूम खोलना चाहते थे। इंटरनेट पर टाटा ट्रेंड लिमिटेड सर्च किया तो एक वेबसाइट खुली। तभी अंकित शर्मा नाम के व्यक्ति ने उसे काॅल कर कहा कि वह कंपनी के मुंबई ऑफिस से बात कर रहा है। कंपनी ने उसकी ईमेल आईडी पर शोरूम खोलने से संबंधित दिशानिर्देश दिए हैं। उसके बाद दोनों की फोन पर बातचीत हुई। फोन करने वाले ने उससे 28 अप्रैल 2025 को सर्वप्रथम एरिया लॉकिंग के लिए 49,500 रुपये की रकम मांगी। उसकी ओर से दिए गए बैंक खाते में रकम एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर की गई।
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अगले दिन सिक्योरिटी के नाम पर 2.95 लाख रुपये की डिमांड की गई। उसने फिर से दिए गए उसी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद उससे इंटीरियर के नाम पर 6.25 लाख रुपये मांगे गए जो उसने 30 अप्रैल 2025 को अपनी माता रश्मि गोयल के खाते से ट्रांसफर किए। फिर उससे प्रोडक्ट्स डिलीवरी के नाम पर 5.25 लाख रुपये मांगे गए जो उसने एक मई 2025 को एनईएफटी कर दिए। इसके बाद अंकित शर्मा ने उससे गाड़ी निकालने, इंटीरियर सामान का इंश्योरेंस करने एवं फायर एनओसी लेने के नाम पर तीन लाख रुपये की डिमांड की तो उसे शक हुआ।



विदुश ने बताया कि जब वह डिटेल्स चेक करने बैंक ऑफ बड़ौदा गया तो पता चला की काॅल करने वाले की ओर से दिया गया खाता किसी कंपनी के नाम पर नहीं है बल्कि किसी पप्पू नाम के आदमी का है। इससे उसके होश उड़ गए और ठगी का अहसास हुआ।
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कोट- पीड़ित की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। -दीपक सिंह, सीओ।

पैसे गंवाने के बाद पता चली गलती



पीड़ित ने बीए और एलएलबी किया है। वह साइबर क्राइम को लेकर पूरी तरह सतर्क था। उसके बाद भी उसके साथ ठगी हो गई। उसने बताया कि कंपनी का जीएसटी नंबर चेक कर लिया था। बस एकाउंट नंबर चेक नहीं हो पाया। एनईएफटी के लिए बैंक पर्ची पर कंपनी का नाम भरकर चार बार पैसे ट्रांसफर किए लेकिन एक बार भी बैंककर्मी की इस पर नजर नहीं पड़ी। फ्रेंचाइजी लेने के लिए कंपनी के पोर्टल पर क्वेरी डाली थी। उसे क्या पता था कि उसके साथ इतनी बड़ी ठगी हो जाएगी।
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