रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) ने दस्तक दे दी है। जिले में अब तक 28 पशुओं में लंपी वायरस की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग ने सैंपलिंग, निगरानी और टीकाकरण तेज कर दिया है। विभाग ने अब तक 70 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण करने का दावा किया है। प्रभावित पशुओं को आइसोलेट कर उपचार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रभावित गांवों के 10 किमी के दायरे में रिंग वैक्सीनेशन और मच्छर-मक्खी-टिक्स के नियंत्रण के लिए वेक्टर कंट्रोल अभियान चलाया जा रहा है। पशुओं की आवाजाही और पशु मेलों पर भी नजर रखी जा रही है।
लंपी एक कैपरीपॉक्स वायरस से होने वाली संक्रामक बीमारी है। इसमें पशु को तेज बुखार, आंख-नाक से पानी आना, शरीर पर 0.5 से 5 सेमी तक की गांठें, लिम्फ नोड में सूजन और दूध उत्पादन में भारी गिरावट जैसे लक्षण दिखते हैं। बीमारी मच्छर, मक्खी और चीचड़ों के काटने से होती है और एक पशु से दूसरे में फैलती है।
बचाव कैसे करें-
बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और अलग से चारा-पानी दें।
पशुबाड़े की नियमित सफाई और चूने-फिनाइल से कीटाणुशोधन करें, मक्खी-मच्छर भगाने के लिए कीटनाशक/रेपेलेंट का प्रयोग करें।चार माह से अधिक उम्र के स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण जरूर कराएं, संक्रमित पशु को टीका न लगाएं।
एक ही सुई से कई पशुओं को इंजेक्शन न लगाएं, पशुओं को एक साथ चराने से बचें।
लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचना दें।
सैंपल की जांच आईवीआरआई बरेली में
रुद्रपुर। जिले में मिले लंपी के संदिग्ध मामलों के सैंपल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। पशुपालन विभाग ने हर ब्लॉक में 2-2 रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की हैं, जो गांव-गांव जाकर पशुओं की सैंपलिंग, टीकाकरण और पशुपालकों को जागरूक करने का काम कर रही हैं।
लंपी वायरस का संक्रमण इंसानों में नहीं होता। यह केवल गाय-भैंस वर्ग के पशुओं की बीमारी है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी और समय पर टीकाकरण जरूरी है। गर्म करके दूध पीना भी पूरी तरह से सुरक्षित है। लंपी से बचाव के लिएजिले में बृहद टीकाकरण किया जा रहा है। टीमें लगातार सैंपलिंग भी कर रही हैं। -डॉ. आशुतोष जोशी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।