जामा मस्जिद के जीर्णोद्घार हेतु डाले जा रहे लिंटर के धराशायी होने के मामले में डीएम अक्षत गुप्ता ने मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए हैं। जांच का दायित्व एसडीएम ऋचा सिंह को सौंपते हुए पंद्रह दिन में रिपोर्ट मांगी है। सात नवंबर को 86 गुणा 90 वर्ग फीट क्षेत्रफल में डाला जा रहा लिंटर भरभरा कर धराशायी हुआ था। जिसमें सात लोग घायल हुए थे।
टनकपुर रोड स्थित जामा मस्जिद के जीर्णोद्घार के दौरान 86 गुणा 90 वर्ग फिट में लिंटर डाला जा रहा था। इसमें 87 मजदूरों के अलावा कई ठेकेदार मिस्त्री एवं श्रद्धालु कारसेवा में जुटे थे। शटरिंग के कमजोर पड़ने से दोपहर बाद एक तिहाई लिंटर भरभराकर धराशायी हुआ था। धराशायी लिंटर को हटाने में आम जनता, पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन ने पांच घंटे तक मशक्कत की। जिसमें सात लोग घायल हुए थे। घायलों को मुख्यमंत्री ने 25-25 हजार की आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी थी।
एसडीएम ने दो कमेटियां गठित कर मलबा हटाने एवं लिंटर गिरने के कारणों का पता लगाया था। जांच रिपोर्ट ने लगभग 18 लाख खर्च होने तथा कमजोर शटरिंग के कारण लिंटर गिरने की रिपोर्ट मिली थी। एसडीएम ने बताया कि मजिस्ट्रेटी जांच में तकनीकी खामियां एवं अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी और इंजीनियरों की सलाह उनके नक्शे आदि तथ्यों की जानकारी ली जाएगी। इस दौरान सुझाव भी लिए जाएंगे। इधर जुमे की नमाज को देखते हुए तहसीलदार राधेश्याम राणा, पटवारी सदर नरेंद्र गहतोड़ी पुलिस बल के साथ मस्जिद में मौजूद रहे। नमाज पूरी होने के बाद ही पुलिस प्रशासन के लोग वहां से हटे।