रुद्रपुर। घर-घर स्वच्छता की अलख जगाकर देश को खुले में शौच से मुक्त करने के बाद अब सरकार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में जुटी है। राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर बायोगैस प्लांट लगाने की योजना है ताकि घर में खाना बनाने के लिए बाहरी ईंधन पर निर्भर न रहना पड़े और कृषि के लिए किसानों को जैविक खाद भी उपलब्ध हो जाए।
भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह योजना किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इसका उद्देश्य बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के साथ खेती के लिए जैविक खाद उपलब्ध कराना है। बायोगैस संयंत्रों से उत्पन्न बायोगैस खाना पकाने के लिए एक स्वच्छ और किफायती ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। इस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी (बायोस्लरी) एक उत्कृष्ट जैविक खाद होती है जो रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने में मदद करती है।
प्रति संयंत्र दो हजार रुपये का मिलेगा प्रोत्साहन
बायोगैस संयंत्रों की स्थापना और रखरखाव से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही बायोगैस का उपयोग करने से जीवाश्म ईंधन के उपयोग में कमी आएगी जिससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। इस वित्तीय वर्ष जिले में 118 बायोगैस संयंत्र लगाने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए संयंत्र लगाने पर सरकार प्रति परिवार दो हजार रुपये का प्रोत्साहन राशि भी दे रही है।
कोट
राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम के तहत जिले में 118 संयंत्र लगाने का लक्ष्य मिला है। उरेडा को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। - मनीष कुमार, सीडीओ