अध्ययन के सह-जांचकर्ता डॉ. दीपक संगरोया, ओपी जिंदल ग्लोबल बिजनेस स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव काबरा और बेनेट यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर डॉ. निशांत सिंह हैं। उन्होंने बताया कि इस अध्ययन को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से वित्त मदद दी गई थी। प्रो. राय ने कहा कि बाजरा एक टिकाऊ फसल है जो न केवल पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि भंडारण में भी आसान है और मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाती है।
बताया कि सर्वेक्षण के लिए राज्य के प्रमुख पहाड़ी क्षेत्रों पिथौरागढ़, जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य से नमूने एकत्रित किए गए। बाजरा को स्थानीय समुदाय के लिए मुख्य भोजन माना जाता है।
उधर मुख्य वक्ता जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के प्रोफेसर डॉ. पुष्पा लोहानी और डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में मडुवे का एमएसपी 35.78 रुपये किग्रा करने की घोषणा की है। किसानों को इसकी जानकारी नहीं है। बताया कि भारत में मिलेट्स उगाने का इतिहास हड़प्पा सभ्यता में मिलता है जो भारत में हरित क्रांति तक जारी रही लेकिन हरित क्रांति के बाद किसान गेहूं-चावल उगाने पर ज्यादा जोर देने लगे और हमने प्राचीन व पौष्टिक भोजन खो दिया। उन्होंने बताया कि हरित क्रांति के बाद बाजरा की खेती का क्षेत्र 40 से घटकर 20 फीसदी रह गया। धारवाड़ में बाजरा किसानों पर कर्नाटक विवि की ओर से किए एक शोध से पता चलता है कि बावजूद इसके किसानों ने मोटे अनाज से अपनी आय में दोगुनी वृद्धि की है।