रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर सहित पूरे देश में होने वाली जनगणना के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इस कार्य में शिक्षकों की बड़ी संख्या में तैनाती की जा रही है। जिले के लगभग 30 प्रतिशत स्कूलों के सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगा दी गई है जिससे शिक्षा व्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
जनगणना देश के विकास और निर्माण के लिए जितनी जरूरी है। उतनी ही शिक्षा राष्ट्र की प्रगति का आधार स्तंभ है। इन दोनों के कार्यों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। शिक्षकों की जनगणना में भूमिका को लेकर जो चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं उन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
प्रशासन को ऐसे उपाय खोजने होंगे, जिससे जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके और साथ ही स्कूलों में शिक्षा का पहिया भी बिना रुके चलता रहे। जिले में 25 अप्रैल से 25 मई तक प्रथम चरण चरण की जनगणना होनी है। जनगणना दो चरणों में होगी। ऊधम सिंह नगर के अधिकांश स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना के लिए लगा दी गई है। ऐसे में स्कूल इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सभी जनगणना करेंगे तो स्कूलों में दाखिले और पढ़ाई कौन कराएगा।
- छात्रों की पढ़ाई का होगा नुकसान
यह स्थिति विशेष रूप से उन स्कूलों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जहां शिक्षकों की संख्या पहले से ही कम है। ऐसे में यदि इन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगा दी जाती है तो कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है। जिससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होने की आशंका है।
- जनगणना का काम जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों को लगाया गया है। सभी बीईओ को निर्देश दिए है कि यदि शिक्षक जनगणना करेंगे तो स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित न हो। हरेंद्र कुमार मिश्रा, प्रभारी सीईओ