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कनाडा भेजने के नाम पर बुजुर्ग से 15 लाख रुपये की ठगी

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रुद्रपुर। बुजुर्ग के भतीजे को कनाडा भेजने के नाम पर परिचित ने उनसे 15.25 लाख रुपये ठग लिए। परिचित ने रुपये लेने के बाद भतीजे को कनाडा का फर्जी टिकट व वीजा थमा दिया जिसका खुलासा दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद हुआ। अब परिचित न उसे विदेश का वीजा उपलब्ध करा रहा है और न ही उनके रुपये वापस कर रहा है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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बराड़ नगर थाना रुद्रपुर निवासी अजमेर सिंह ने पुलिस को सौंपी तहरीर में बताया कि उनके दो बेटे विदेश में रह कर नौकरी करते हैं। इस वजह से वह अपने भतीजे बहेड़ी जिला बरेली निवासी सरजीत के साथ रहते हैं। अजमेर ने बताया कि वर्ष 2019 में वह रुद्रपुर डॉक्टर कॉलोनी में दवा लेने गए थे। उनकी मुलाकात गांव हासूनगला, बहेड़ी निवासी गुरविंदर सिंह से हुई थी। इसके बाद गुरविंदर ने उनके घर में पहुंच कर मुलाकात की और बताया कि वह लोगों को विदेश भेजने का काम करता है।
अजमेर ने सरजीत को विदेश भेजने की बात कही तो गुरविंदर ने कुल खर्चा 15 लाख रुपये बताया। उनके बीच डील फाइनल हो गई और सरजीत ने गुरविंदर की पत्नी कंवलजीत कौर, रिश्तेदार जसविंदर के बैंक खाते में करीब सवा 10 लाख रुपये भेजे। इसके अलावा पांच लाख रुपये गुरविंदर को नकद दिए। गुरविंदर ने कनाडा का वीजा और हवाई टिकट सरजीत को दे दिया।
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आरोप है कि जब सरजीत दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा तो वहां पर बताया गया कि वीजा व हवाई टिकट फर्जी हैं। इसके बाद गुरविंदर अजमेर सिंह को लगातार कोविड का हवाला देकर टहलाता रहा। कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर गुरविंदर सिंह, जसविंदर सिंह और कंवलजीत कौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
तराई में विदेश भेजने के नाम पर हो चुकी है करोड़ों की ठगी
रुद्रपुर। तराई से विदेश भेजने के नाम पर रुपयों की ठगी का मामला नया नहीं है। करीब हर माह ऐसे मामले सामने आते हैं। पिछले एक साल के भीतर तराई के अंदर विदेश भेजने के नाम पर करीब करोड़ों रुपये की ठगी हो चुकी है। विदेश भेजने वाले फर्जी डिग्री के जरिए लोगों को बाहर भेजते हैं नहीं तो दूसरी डिग्रियां बनवा कर बाहर भेजते हैं। सबसे खास बात यह है कि ऐसे मामले हमेशा कोर्ट के आदेश पर दर्ज होते हैं।
इन मामलों में हमेशा आरोप रहता है कि पुलिस के पास गए केस दर्ज नहीं किए गए जिस कारण से इन मामलों को सामने आने में काफी समय लग जाता है। एसपी सिटी मनोज कत्याल का कहना है कि मामले की जांच करने के बाद उसे दर्ज किया जाता है। इस वजह से मामले दर्ज होने में समय लग सकता है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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