परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय से तमाम महत्वपूर्ण पत्रावलियां और पंजिकाएं गायब हैं। इन दस्तावेज के एनएच घोटाले से जुड़े होने की संभावना है। पत्रावलियों के गुम होने का खुलासा सूचना अधिकार अधिनियम के तहत हुआ है।
मोहल्ला काजीबाग निवासी अधिवक्ता कमल कुमार सक्सेना ने 28 जून को आरटीआई के तहत आवेदन देकर एक जनवरी 2017 से सूचना दिए जाने की अवधि तक धारा 143 के तहत हुए निर्णयों और आदेशों की प्रमाणित छायाप्रति मांगी थी। इसके अलावा इस अवधि में लंबित पड़े फाइलों की प्रमाणित सूची भी उपलब्ध कराने को कहा था, जिस पर लोक सूचना अधिकारी ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई।
अपीलीय अधिकारी एसडीएम विनीत तोमर ने मौखिक कथन किया कि कार्यालय से अभिलेख चोरी हो जाने के कारण आईटीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिससे पूर्ण सूचना नहीं दी जा सकती। एफआईआर की प्रमाणित प्रति मांगने से खुलासा हुआ कि एसडीएम न्यायालय से धारा 143 से संबधित वर्ष 1999-2000 से लेकर 2010-11 और वर्ष 2016-17 की पंजिका गायब हैं। वर्ष 1999-2000 से लेकर 2016-17 तक के रजिस्टर, सूचना एवं निरीक्षण पंजिका भी गायब हैं।
पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका निलंबित राजस्व अहलमद
परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय से भू-सुधार अधिनियम से जुड़ी पंजिका और पत्रावलियां गायब करने के मामले में नामजद निलंबित राजस्व अहलमद की तलाश में पैगा चौकी पुलिस ने उसके आवास व एक अन्य ठिकाने पर दबिश दी। पूर्व में एसआईटी भी उसकी धरपकड़ के लिए दबिशें दे चुकी है, परंतु वह हत्थे नहीं चढ़ सका है।
एसडीएम न्यायालय से संबद्ध किए गए राजस्व अहलमद अरुण कुमार ढौंडियाल ने 27 जुलाई को आईटीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि राजस्व अहलमद संजय चौहान ने परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय से भू-सुधार अधिनियम से जुड़ी पंजिका और पत्रावलियां गायब कर दी। इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक ओमप्रकाश को सौंपी गई थी। विवेचनाधिकारी ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर दबिश दी, लेकिन आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। उधर, एनएच घोटाले में कथित लिप्तता के चलते एसआईटी भी उसकी तलाश में दबिशें दे चुकी है।