पंतनगर। ठंड के दो माह (नवंबर, दिसंबर) बीतने के बावजूद भी बारिश नहीं होने से लगभग सभी फसलों (अनाज, दलहन, तिलहन, फलों और सब्जी वर्गीय) का उत्पादन प्रभावित होगा।
पत्तियों पर जमी धूल साफ नहीं होगी। इसके चलते फोटो सिंथेसिस की कमी से पौधों की बढ़वार तो रुकेगी ही, फसलों में बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ेगा। ऐसे में पौधों को बीमार होने से बचाने के लिए जल्द बारिश की दरकार है।
जीबी पंत कृषि व प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि व मौसम विशेषज्ञ डाॅ. अजित सिंह नैन ने बताया कि बारिश न होने से पर्यावरण सहित फसलों पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं।
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बढ़ने से धूल जमने के कारण पौधों के स्टोमेटा अपना फंक्शन ढंग से नहीं कर पाते हैं। इससे फोटो सिंथेसिस पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं बारिश से धूल साफ हो जाती है और पौधे फोटो सिंथेसिस क्रिया ढंग से कर पाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का एक्सचेंज भी अच्छा होता है।
डाॅ. नैन ने बताया कि बारिश होने से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन पौधों को मिल जाता है जबकि बारिश न होने से पौधों में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। खेत में अतिरिक्त नाइट्रोजन डालनी पड़ती है।