रुद्रपुर। बुधवार से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र से पहले बच्चों के भारी स्कूल बैग का मुद्दा फिर चर्चा में है। अभिभावकों और बाल रोग विशेषज्ञों ने इस बढ़ते बोझ को बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक बताया है। अभिभावकों का कहना है कि किताबों का बढ़ता बोझ बच्चों की दिनचर्या और शारीरिक सेहत को प्रभावित कर रहा है। बच्चे स्कूल से घर लौटते ही थक जाते हैं और उनमें खेलने की ऊर्जा नहीं बचती। उन्होंने स्कूलों में लॉकर की व्यवस्था और केवल संबंधित विषयों की किताबें लाने का सुझाव दिया है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एसके गोस्वामी ने बताया कि बच्चों के शरीर के वजन के दस से पंद्रह फीसदी से अधिक भारी बैग उठाना खतरनाक है। इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, जिससे कमर दर्द, गर्दन दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टर गोस्वामी ने चेतावनी दी कि लगातार भारी बैग ढोने से रीढ़ की प्राकृतिक संरचना भी प्रभावित हो सकती है।
इनसेट-
अगर स्कूल में लॉकर की व्यवस्था हो जाए तो बच्चों को रोज सभी किताबें लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे उनका बोझ काफी कम हो सकता है और जिस दिन जिस विषय की पढ़ाई हो, उस दिन वो ही किताब मंगाई जाये।
-जितेन्द्र सिंह, प्रीत विहार रुद्रपुर
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बच्चों का बैग इतना भारी जाता है कि बच्चे स्कूल से थककर घर पहुंचते हैं। इसके लिए स्कूलों को किताबों की संख्या कम करनी चाहिए और जरूरत के हिसाब से ही किताबें मंगवानी चाहिए।
-शिखा गुप्ता, कौशल्या वाटिका, रुद्रपुर