बाजपुर। ग्राम हरसान के तहत नई आबादी को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिलने से लोगों को खाद, बीज सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं, बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नई आबादी हरसान के निवासियों को मताधिकार से भी अलग रखा गया था। इससे ग्रामीणों में खास नाराजगी भी है।
वर्ष 1970 में ग्राम पंचायत हरसान से सटे क्षेत्र में शिल्पकार परिवारों को विस्थापित किया गया था। बताते हैं कि नई आबादी में सरकार की ओर से हैंड पम्प, बिजली कनेक्शन, आंगनबाड़ी केंद्र सहित अन्य सुविधाएं दी गई हैं। वर्तमान में नई आबादी में करीब 150 परिवार निवास करते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि पहले से चुनाव में वह मतदान करते आ रहे थे। बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उन्हें मतदाता सूची से हटा दिया गया। इससे नई आबादी के लोग मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके।
इन निवासियों को जमीन की खतौनी तक नहीं मिलती है। इससे सरकार की कई योजनाओं का उन्हें लाभ नहीं मिल पाता है। वर्तमान प्रधान उर्मिला पंत और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंत ने बताया कि नई आबादी हरसान को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिलने से दिक्कत का आ रही है।
नई आबादी हरसान को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडl देहरादून जाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलेगा। प्रधान ने बताया कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आबादी के मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था।
वहीं एसडीएम डाक्टर अमृता शर्मा ने बताया कि गांव नई आबादी हरसान को राजस्व गांव का दर्जा नहीं होने के कारण वहां के निवासी पंचायत चुनाव में मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए हैं जबकि लोकसभा और विधानसभा में लोगों ने मताधिकार किया है।