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Udham Singh Nagar News: भूजल संकट की आहट, धड़ल्ले से चल रहे वाटर पार्क

Tue, 02 Jun 2026 12:27 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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सितारगंज। एक ओर भीषण गर्मी के चलते प्राकृतिक जल स्रोत लगातार सूख रहे हैं। भूजल स्तर निरंतर नीचे खिसक रहा है। पिछले साल तराई क्षेत्र के कई स्थानों में पेयजल संकट गहरा गया था। वहीं, दूसरी ओर शक्तिफार्म में खुले वाटर पार्कों में प्रतिदिन लाखों लीटर भूजल सिर्फ मौज-मस्ती के नाम पर बहाया जा रहा है। इससे पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों में चिंता बढ़ने लगी है।
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गर्मी के बढ़ते प्रकोप के साथ क्षेत्र में वाटर पार्कों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। केवल शक्तिफार्म में ही पिछले कुछ समय में छह वाटर पार्क संचालित हो रहे हैं। इनमें रोजाना सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं।
वाटर पार्क संचालक गहरे बोरवेल और सबमर्सिबल पंपों के माध्यम से भारी मात्रा में भूजल निकालकर कृत्रिम तालाबों और स्विमिंग पूलों में भर रहे हैं। दिनभर उपयोग के बाद यह पानी नालों और खेतों की ओर बहा दिया जाता है।
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भूजल संकट की चेतावनी के बावजूद बढ़ रही लापरवाही
पिछले वर्ष कई स्थानों में भूजल स्तर गिरने से कई हैंडपंप सूख गए थे। कई लोगों को पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी थी। जल संकट को देखते हुए सरकार ने अत्यधिक पानी खपत वाली बेमौसमी धान की खेती पर भी रोक लगाई थी। सरकार का तर्क था कि इस फसल में जरूरत से ज्यादा भूजल का दोहन होता है। इसके बावजूद क्षेत्र में कई स्थानों पर बेमौसमी धान की खेती हो रही है और अब वाटर पार्कों के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर भूजल का दोहन किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार पानी की बर्बादी जारी रही तो आने वाले वर्षों में भूजल स्तर और तेजी से गिर सकता है।
किस विभाग से मिली अनुमति, कोई नहीं जानता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश वाटर पार्कों के संचालन को लेकर प्रशासनिक निगरानी लगभग न के बराबर है। यह स्पष्ट नहीं है कि इन पार्कों को भूजल दोहन, पर्यावरणीय स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक मानकों की अनुमति प्राप्त है या नहीं। संबंधित विभागों की तरफ से भी कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

सुरक्षा मानकों पर भी उठ रहे सवाल
वाटर पार्कों में सुरक्षा मानकों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। किसी भी वाटर पार्क में न तो प्रशिक्षित लाइफगार्ड की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त फर्स्ट एड की सुविधा हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण और अग्निशमन संसाधनों का भी अभाव दिखाई देता है। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

जल संरक्षण का संदेश, लेकिन कार्रवाई नहीं
गर्मी के मौसम में सरकार और प्रशासन लगातार जल संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। विभिन्न विभागों की तरफ से जल है तो कल है जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद खुलेआम लाखों लीटर भूजल की बर्बादी पर प्रभावी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।

कोट -
शक्तिफार्म में संचालित सभी वाटर पार्कों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच के दौरान सुरक्षा, पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक मानकों में किसी प्रकार की अनियमितता या कमी पाई जाती है तो संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जनसुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा सभी वाटर पार्कों को निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। - तुषार सैनी, एसडीएम, सितारगंज
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