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पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि सुधार पर ध्यान दें वैज्ञानिक 

Tue, 31 May 2016 04:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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राज्‍यपाल - फोटो : अमर उजाला
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राज्यपाल डा. कृष्णकांत पॉल ने कहा कि देश में हरित क्रांति लाने में पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पंतनगर के वैज्ञानिकों को पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि समस्याओं का समाधान कर अब एक और क्रांति लाना चाहिए। राज्यपाल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की क्षेत्रीय समिति की 24वीं बैठक के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि एवं पशुधन पर ध्यान देकर अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सकता है। पहाड़ी इलाकों में मिश्रित खेती और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए। क्षेत्र विशेष के अनुसार कृषि पद्धति के मॉडल तैयार किए जाएं। पर्वतीय क्षेत्रों की फसलों के लिए पंजीकृत बीज एवं पौध उपलब्ध कराए जाएं। जंगली जानवरों खासतौर पर बंदरों की समस्याओं से निपटने के लिए कारगर उपाय किए जाएं। राज्यपाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में मार्केटिंग की विकट समस्या है। किसानों को बाजार से जोड़कर उन्हें उनके उत्पादों का वाजिब मूल्य दिलाने के प्रयास होना चाहिए।

जम्मू एवं कश्मीर के कृषि मंत्री गुलाम नबी लोन ने कहा कि सुगंधित चावल, केसर, राजमा, पशमीना भेड़ और औद्यानिकी उत्पादों ने जम्मू कश्मीर की कृषि को अधिक लाभप्रद बनाया है। इन पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। उन्होंने वर्षाधीन एवं वातावरण के अनुकूल प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने और कृषि के समन्वित विकास की जरूरत बताई।  
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आईसीएआर के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्र ने कहा कि क्षेत्रीय समितियों के माध्यम से भारत सरकार एवं आईसीएआर राज्यों की कृषि विकास में आ रही कठिनाई दूर करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ने की बहुत संभावनाएं हैं। आईसीएआर के उप महानिदेशक (औद्यानिकी) डा. एनके कृष्ण कुमार ने बताया कि क्षेत्रीय समिति उत्तराखण्ड, हिमाचल, जम्मू एवं कश्मीर की कृषि एवं संबंधित विषयों की समस्याओं पर चर्चा करेगी। 

पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मंगला राय ने कहा कि पर्वतीय खेती की भावी संभावनाएं, पशुओं से मनुष्यों एवं मनुष्यों से पशुओं में होने वाली जूनोटिक बीमारियों, कृषि पत्रकारिता को आम पत्रकारिता के समकक्ष लाने के विषयों पर आयोजित संगोष्ठियों की संस्तुतियां भी इस बैठक में रखी जाएंगी। 

इस दौरान राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं पदेन सचिव अरुण कुमार ढौंडियाल, भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून के निदेशक डा. पीके मिश्र, प्रोफेसर डा.अनुराधा दत्ता ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में राज्यपाल केके पॉल ने पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा कृषि के विभिन्न विषयों पर तैयार किए गए साहित्य का विमोचन भी किया।
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