उकरौली गांव में आग से नौ परिवारों के घरेलू सामान व दुकानों का सामान जलकर राख हो गया। तहसीलदार आरसी गौतम ने आग की घटना का मुआयना किया। आग से नौ परिवारों को करीब छह लाख 40 हजार छह सौ रुपये का नुकसान हुआ है।
बुधवार की दोपहर करीब 12:30 बजे उकरौली गांव में राम लखन का परिवार खाना बना रहा था। इसी बीच उसके छप्पर में आग लग गई। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते कि आग ने विकराल रूप ले लिया। आग से रामलखन पुत्र मोती लाल का 15 हजार, नलई निवासी मान सिंह पुत्र हरीश सिंह का एक लाख 14 हजार, शक्तिफार्म के सतेंद्र सिंह पुत्र वीर बहादुर का एक लाख 65 हजार, सितारगंज के मनोज पुत्र देवसरन का 39 हजार, उकरौली के निर्मल माझी पुत्र कालीपद माझी का पांच हजार पांच सौ, पड़ागांव के तापस विश्वास पुत्र हीरा लाल का एक लाख 16 हजार, नलई के ध्यान सिंह पुत्र राम सिंह का 32 हजार, उकरौली की संध्या पत्नी सुशांत का एक लाख 51 हजार व इसी गांव के छोटे लाल पुत्र परमेश्वरी लाल का तीन हजार एक सौ का सामान जलकर राख हो गया।
आग की सूचना पर रैकिट बेनकीजर व फायर ब्रिगेड के वाहन ने भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तहसीलदार गौतम ने आग की घटना का मुआयना किया। तहसीलदार ने बताया कि पीड़ित परिवारों को मुआवजे के लिए रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। इधर, पूर्व विधायक नारायण पाल ने उकरौली गांव पहुंचकर आग की घटना से पीड़ित परिवारों का हाल जाना। पाल ने कहा कि जल्द ही पीड़ितों को शासन-प्रशासन से मुआवजा दिलाया जाएगा।
नानकमत्ता में 18 एकड़ गेहूं जला
नानकमत्ता। बिडौरा गांव के जय सिंह व दशरथ सिंह के गेहूं कटे खेत में दोपहर करीब ढाई बजे आग लग गई। तेज हवा से आग ने विकराल रूप ले लिया। पश्चिम से पूरब की ओर आंधी की तरह चल रही हवा ने बिडौरी, घेरा व खेमपुर गांव तक किसानों के गेहूं कटे खेतों को अपनी चपेट में ले लिया। किसानों खेतों की जुताई कर और ट्यूबवेलों एवं हाथों में पेड़ों की टहनियों से आग बुझाई।
थाना पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अमले को भी सूचना दी गई। डेढ़ घंटे बाद फायर ब्रिगेड का वाहन पहुंचा तब तक ग्रामीणों ने आग पर काबू पा लिया था। अलबत्ता आग से घर व जनहानि होने से बच गई। आग से बिडौरा निवासी बाल किशन व फुम्मन सिंह का एक-एक एकड़, भूप सिंह व जीत सिंह का तीन-तीन एकड़, रेशम सिंह व अमरीक सिंह का दो-दो एकड़, जगीर सिंह का छह एकड़ गेहूं जल गया।
इसके अलावा खेतों में काटकर रखी फसल व भूसा भी राख हो गया। समाचार लिखे जाने किसी भी अधिकारी ने पीड़ित किसानों की सुध नहीं ली थी। जिससे किसानों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। पीड़ितों ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व भी उनके खेत आग की भेंट चढ़े थे।