सितारगंज। हाईवे पर फोरलेन निर्माण की जद में आ रहे नौ मकानों को प्रशासन की मौजूदगी में पोकलैंड से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान एक मकान को गलत तरीके से तोड़ने पर बवाल खड़ा हो गया। राजस्व विभाग और गल्फार कंपनी के अधिकारियों ने कमरे में सो रहे बच्चों को बाहर निकालने से पहले ही दोमंजिला कमरे को पोकलैंड से तोड़ना शुरु कर दिया। इससे ग्रामीण उग्र हो गए और उन्होंने तहसीलदार के खिलाफ जमकर रोष जताया। पुलिस ने ग्रामीणों के विरुद्ध एक्शन लिया तो कुछ लोगों ने एक पुलिस अफसर के साथ मारपीट कर दी। एएसपी देवेंद्र पिंचा और एसडीएम विनोद कुमार ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और विवादित मकान को तोड़ने का कार्य रुकवा दिया।
बृहस्पतिवार को कुंवरपुर सिसैया गांव में फोरलेन की जद में आ रहे मकानों में से करीब नौ मकान टूटने थे। सुबह 10 बजे कार्यदायी संस्था गल्फार कंपनी के अधिकारी राजस्व अधिकारियों के साथ गांव में मकान तोड़ने पहुंचे। यहां उन्होंने करीब आधा दर्जन लोगों के मकान जेसीबी से धराशायी कर दिए। शाम करीब चार बजे कृष्णा देवी पत्नी खेमपाल सिंह के मकान को अचानक ही राजस्व और गल्फार कंपनी की टीम ने पोकलैंड से तोड़ना शुरू किया। जबकि, इस मकान में कृष्णा देवी की नातिन माही (ढाई वर्षीय) और इशिका (5) अपनी मां रेनू के साथ सोए हुए थे। अचानक मकान गिराने से परिवार में हड़कंप मच गया। जैसे-तैसे तीनों को कमरे से बाहर निकाला गया। पोकलैंड से दोमंजिला मकान गिराने के कारण उसमें रखा डबल बेड, अलमारी, एलईडी और अन्य घरेलू सामान भी नष्ट हो गया।
खेमपाल और उसके बेटे उमेश सिंह ने तहसीलदार कुमार की कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कार्यदायी कंपनी के अधिकारियों ने पूर्व में सड़क के बीचोबीच से मकान तक नपत कर 21.6 मीटर तक जगह खाली कराने का निशान लगाया था, जिसके आधार पर वह मकान तोड़ चुके हैं। आरोप लगाया कि आज जब मकान तोड़ने टीम आई तो 26 मीटर पर निशान लगाकर मकान तोड़ डाला। जबकि, उसे 21.6 मीटर के दायरे में आ रहे मकान को तोड़ने का करीब 6.54 लाख रुपए मुआवजा भी दिया गया है।
मकान तोड़ने के बाद तहसीलदार व ग्रामीणों की नोकझोंक हो गई। पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ एक्शन लिया तो कुछ लोगों ने एक पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट कर दी। इस पर कोतवाल बीएस भाकुनी तत्काल मौके पर पहुंचे और फिर उच्चाधिकारियों को मामले की सूचना दी। इसके बाद एएसपी देवेंद्र पिंचा और एसडीएम विनोद कुमार ने घटनास्थल पहुंचकर मामले की जानकारी ली और विवादित मकान को ध्वस्त करने का कार्य रुकवा दिया। एएसपी पिंचा और एसडीएम ने गल्फार कंपनी के लाइजनिंग मैनेजर पीके चौधरी को पैमाइश करने के निर्देश दिए और तब तक के लिए विवादित मकान पर यथास्थिति रखने को कहा है।
कुंवरपुर सिसैया में गल्फार कंपनी के अधिकारियों और राजस्व विभाग की टीम ने करीब दस बार सड़क से मकान तक नपत की। लेकिन, मामले का हल नहीं किया। कभी तहसीलदार फीते से नपत कर खेमपाल के निशान को सही ठहराते तो कभी लाइजनिंग अधिकारी के फीता डालने पर उसकी नपत को सही बताते। यह सिलसिला चलता रहा। लेकिन, शाम तक हल नहीं निकला। इस पर एएसपी देवेंद्र पिंचा और एसडीएम विनोद कुमार ने मकान ध्वस्त करने से रोक आगे के चिन्हित मकानों को तोड़ने के आदेश दिए। कहा कि सही तरीके से पैमाइश करने के बाद ही मकान तुड़वाया जाएगा। ब्यूरो
तहसीलदार की टिप्पणी से भड़के लोग
सितारगंज। कुंवरपुर सिसैया में कृष्णा देवी का मकान ध्वस्त करने के बाद जब ग्रामीणों ने तहसीलदार सुदेश कुमार के समक्ष विरोध जाहिर किया तो तहसीलदार ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। यह सुन ग्रामीण भड़क उठे और तहसीलदार को जमकर खरीखोटी सुनाई। पुलिस कर्मियों ने तहसीलदार को भीड़ के बीच से बमुश्किल बाहर निकाला। ग्रामीणों ने तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
। एसएसपी देवेंद्र पिंचा ने कहा कि पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। उन्होंने मारपीट करने वालों को तत्काल चिन्हित कर कोतवाल बीएस भाकुनी को रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। प्रभारी निरीक्षक बीएस भाकुनी ने बताया कि मारपीट से घायल अफसर का सीएचसी में मेडिकल कराया है। ब्यूरो
कुंवरपुर सिसैया में कृष्णा देवी के मकान को अचानक गिराए जाने पर परिवार रो पड़ा। परिवार के सदस्य और बच्चे खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। कृष्णा देवी के बेटे उमेश सिंह ने अधिकारियों से रोते हुए गुहार लगाई। लेकिन, किसी ने एक न सुनी। यहां तक कि उसे मकान खाली करने तक का समय नहीं दिया गया और सीधे मकान ढहा दिया। ब्यूरो