सिडकुल की फैक्ट्रियों का जहरीला पानी नदी, नहर और नालों में बह रहा है। इस जहरीले पानी से धान और गन्ने की फसल खराब हो रही है, मवेशी मर रहे हैं और गांवों के लोगों में भी संक्रामक रोग फैलने का भय है। लेकिन, प्रशासन फैक्ट्रियों का जहरीला पानी रोकने को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। इससे प्रभावित गांवों के लोग उद्योगपतियों और अधिकारियों के विरोध में लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों ने धमकी दी है कि यदि दो दिन के भीतर नदी, नहर और नालों में जाने वाला गंदा पानी नहीं रोका गया तो आंदोलन होगा।
सितारगंज सिडकुल में करीब 150 फैक्ट्रियां प्रोडक्शन कर रही हैं। इन फैक्ट्रियों के गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए 4 एमएलडी (मिलियन लीटर ड्रेन) क्षमता का जिंदल कंपनी का सीईटीपी (कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगा हुआ है। जिसे सिडकुल की 37 फैक्ट्रियां 2.50 एमएलडी गंदा पानी दे रही थीं। लेकिन, जिंदल कंपनी द्वारा सीईटीपी की मेंटीनेंस के नाम पर इसे बीते एक अगस्त से बंद कर दिया गया है। जिस कारण फैक्ट्रियों का जहरीला पानी कैलाश नदी, अपर बैगुल नहर और नालों से होकर बह रहा है। सिंचाई माइनर (अपर बैगुल नहर) पर सिसौना, बरुआबाग, कोटाफार्म, नई बस्ती, बमनपुरी व चौमेला आदि गांवों की लगभग 25 हजार की आबादी निर्भर है इस नहर में फैक्ट्रियों का जहरीला पानी आने से दर्जनों मवेशी मर चुके हैं। गांवों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा मंडरा रहा है। कई ग्रामीण बीमार भी हो चुके हैं।