सिंचाई माइनर में फैक्ट्रियों का जहरीला पानी घुलने के विरोध में ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। उन्होंने नहर में जहरीला पानी रोकने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि प्रशासन से तीन दिन पहले नहर से जहरीला पानी रोकने की मांग की थी। लेकिन, अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने पीसीबी द्वारा फैक्ट्रियों को जारी एनओसी पर भी सवालिया निशान लगाए।
शनिवार को बरूआबाग, सिसौना, कोटाफार्म, नईबस्ती और बमनपुरी गांव के लोगों ने बरूआबाग में नहर के किनारे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि सिडकुल की फैक्ट्रियों का जहरीला (केमिकल युक्त) पानी अपर बैगुल सिंचाई नहर में आने से लोग बीमार हो रहे हैं। मवेशियों की मौत हो रही है और धान व गन्ने की फसल को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। कहा कि तीन दिन पहले एसडीएम से नहर में छोड़ा जा रहा जहरीला पानी रोकने की मांग की गई। लेकिन, प्रशासन इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले पानी को देखकर भी अंजान बना हुआ है।
सिडकुल और सिंचाई विभाग भी उदासीन है। कहा कि नहर में छोड़ा जाने वाला केमिकलयुक्त पानी रोकने तक धरना जारी रहेगा और जल्द ही उनकी मांग पर गौर नहीं किया गया तो सिडकुल को आने वाले सभी रास्ते जाम किए जाएंगे। धरने पर जिला पंचायत सदस्य मंगेश्वरी देवी, वरिष्ठ कांग्रेसी उदय सिंह राणा, महिला आयोग की सदस्य जया जोशी, पूर्व छात्र नेता मुकेश सनवाल, बीडीसी सदस्य रेखा देवी, ग्राम प्रधान पार्वती देवी, पूर्व प्रधान कृष्ण चंद्र कंबोज, सीता देवी, कमलेश, शांति देवी, जीत सिंह, हरजीत सिंह, मंजू देवी, कन्यावती आदि बैठे थे।