काशीपुर। चार दशक बाद भी स्नातकोत्तर (पीजी) में संस्कृत विषय को मान्यता नहीं दी जा सकी है। इस कारण छात्र-छात्राओं को संस्कृत के स्थान पर दूसरे विषय चुनने पड़ रहे हैं।
बाजपुर रोड पर राधेहरी पीजी कॉलेज की स्थापना वर्ष 1973 में की गई थी। यहां जसपुर, रामनगर, बाजपुर, सुल्तानपुर पट्टी, केलाखेड़ा, काशीपुर आदि से छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। संस्कृत विषय से स्नातक करने के बाद छात्र-छात्राओं को स्नातकोत्तर करने के लिए हल्द्वानी और नैनीताल की दौड़ लगानी पड़ती है।
धनाभाव और अन्य कारणों से कई छात्र-छात्राएं शहर से पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जा पाते हैं। ऐसे छात्र दूसरा विषय चुन लेते हैं। 2017 में डॉ. राघव झा की नियुक्ति के बाद ही स्नातक में संस्कृत शुरू हुआ। इससे पहले तीन सालों से पद रिक्त था।
अब स्नातक में करीब 162 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। छात्र-छात्राओं ने बताया कि संस्कृत से पीजी करना है लेकिन यहां नहीं है। बाहर जाकर पढ़ाई करना मुश्किल है। जल्द ही संस्कृत शुरू नहीं होने पर पीजी में विषय बदलना पड़ेगा।