काशीपुर। उत्तराखंड परिवहन निगम ने काशीपुर डिपो में बीएस-4 की 19 बसें तो उपलब्ध करा दी लेकिन इनमें तकनीकी खराबी आने पर उसे सही करने में पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में इन बसों को काठगोदाम मुख्यालय भेजना पड़ रहा है। इसे सही होकर आने में एक से दो दिन का समय लग रहा है।
काशीपुर डिपो में टाटा व लीलैंड की बीएस-4 के 19 बसों का विभिन्न रूटों पर संचालन किया जाता है। मुख्यालय ने डिपो को बस तो उपलब्ध करा दी, लेकिन तकनीकी खामी आने पर उसकी रिपेयरिंग के लिए कंपनी के सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप कार्यशाला में उपलब्ध नहीं कराया है। ऐसी स्थिति में बस में तकनीकी खराबी आने पर उसको डिपो कार्यशाला में सही करना मुश्किल हो जाता है।
कार्यशाला के सीनियर फोरमैन मोहम्मद यामीन ने बताया कि बीएस-4 बस में तकनीकी खराबी होने पर कंपनी के सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप से ही सही की जा सकती है क्योंकि इनमें सेंसर युक्त एक प्लग लगा होता है, जिसको लैपटॉप से अटैच करके वह बस के डीजल, इलेक्ट्रॉनिक व तकनीकी के किस हिस्से में खराबी है उसको स्क्रीन पर बता देता है। उसके बाद मैकेनिक उस खराबी को सही कर देता है।
कार्यशाला में 45 पद रिक्त
सीनियर फोरमैन मोहम्मद यामीन ने बताया एक समय यहां पर 68 तकनीकी कर्मचारी अलग-अलग शिफ्ट में काम करते थे। वर्तमान में मुख्य रूप से बल्क नाइजर, वेल्डर, अपोस्टर, कारपेंटर, लोहार व हेमरमैन के पद रिक्त हैं। वर्तमान में 45 पद रिक्त होने से कई बार समस्या खड़ी हो जाती है जबकि मुख्यालय से समय-समय पर पत्राचार किया जाता है। साथ ही बीएस-4 के लिए लैपटॉप भेजने के लिए पत्राचार किया जा चुका है।