गोवर्धन मठ पुरी के जगतगुरु शंकराचार्य के प्रवचन और संवाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया। कार्यक्रम के दौरान आर्य समाज मंदिर के पुजारी ने शंकराचार्य से चारों वेदों के मंत्रों में हिंदू शब्द के प्रयोग के बारे में पूछा। शंकराचार्य ने अपनी लिखी किताब का हवाला देते हुए पढ़ने को कहा। पुजारी ने उनकी बात नहीं मानी और प्रश्न करने लगे। ऐसे में शंकराचार्य ने डांटकर उपद्रवी कहकर चुप रहने को कहा। अन्य भक्तों के विरोध करने पर पुजारी संवाद कार्यक्रम से चले गए। होटल के दूसरे कक्ष में भी कुछ देर तक बहसबाजी होती रही।
बृहस्पतिवार को काशीपुर बाईपास रोड स्थित एक होटल में गोवर्धन मठ पुरी के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज का प्रवचन व संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में शंकराचार्य ने भक्तों को श्रीमद्भागवत गीता के प्रवचन दिए। उसके बाद भक्तों का संवाद कार्यक्रम शुरू हुआ। शंकराचार्य ने भक्तों के प्रश्नों का जवाब दिया। एक भक्त ने पूछा साईं बाबा क्या भगवान के रूप हैं। शंकराचार्य ने कहा कि मनुष्यों की ओर से बनाए गए भगवान व्यापार के लिए होते हैं। एक वर्ग ने ही बाबा को उठाया और उसी ने उन्हें ठप कर दिया। शंकराचार्य ने कहा मनुष्यों की ओर से बनाए गए बहुत से भगवान आए और गए, लेकिन हर किसी के लिए बाबा भगवान नहीं हो सकते।
इसके बाद आर्य समाज मंदिर के पुजारी प्रभात कुमार आर्य ने शंकराचार्य से प्रश्न किया कि चारों वेदों के मंत्रों में हिंदू शब्द का प्रयोग हुआ है या नहीं। शंकराचार्य ने कहा कि उनकी लिखी हुई किताब पढ़िये, उसमें हिंदू शब्द का प्रयोग मिल जाएगा। ऐसे में सनातन धर्म से जुड़े लोगों ने भड़ककर कहा कि पुजारी आर्य समाज को मानते हैं। पुजारी ने कहा कि वह गुरु जी से सिर्फ उत्तर मांग रहे हैं। शंकराचार्य के भड़कने पर विधायक राजकुमार ठुकराल ने पुजारी को शांत रहने की हिदायत दी। कार्यक्रम में संजय ठुकराल, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिवाकर पांडे, भारत भूषण चुघ, हरीश चौधरी, हरी चंद्र मिड्डा, अशोक बंसल, अशोक अदलखा, नरेंद्र अरोरा, अमित जैन आदि थे।