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जसपुर में दो हजार के 47 नकली नोटों के साथ तीन गिरफ्तार 

Tue, 25 Sep 2018 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो 
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जसपुर में पुलिस गिरफ्त में जाली नोटों के आरोपी। - फोटो : amar ujala
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पुलिस ने दो हजार रुपये के 47 नकली नोटों के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों से आईबी, एलआईयू और स्पेशल ब्रांच आदि खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी पूछताछ कर रहे हैं।  कोतवाली में सोमवार को पत्रकार वार्ता में एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि पुलिस को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में अंतरराज्यीय गिरोह बिहार और पश्चिम बंगाल से नकली करेंसी लाकर बाजार में खपा रहा है।

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रविवार देर शाम को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जसपुर के सूत मिल पुलिस चौकी के पास अंग्रेजी शराब की दुकान में नकली नोट चलाते तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनसे दो-दो हजार के 47 नकली नोट बरामद हुए। गिरफ्तार लोगों ने अपना नाम विक्रम राय मूल निवासी बेतिया जिला चंपारण (बिहार) और हाल निवासी हेमपुर इस्माइल (काशीपुर), सिकंदर साहनी निवासी ग्राम दक्षिण तलुवा थाना नौतन, बेतिया (बिहार) और मनीष वाजपेयी निवासी थाना बिसवां सीतापुर (यूपी) बताया। 

विक्रम राय है गैंग का स्थानीय लीडर
जसपुर। पुलिस की गिरफ्त में आया विक्रम राय अंतरराज्यीय गिरोहा का स्थानीय लीडर है। उसकी दो शादियां हैं। वह आठ वर्ष से हेमपुर इस्माइल में दूसरी पत्नी के साथ रह रहा है। विक्रम अपने दोनों साथियों के साथ बिहार और पश्चिमी बंगाल से 60 प्रतिशत के फायदे पर नकली करेंसी लाकर यहां चलाता है। एएसपी ने आशंका जताई कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए यह नकली करेंसी देश में सप्लाई की जा रही है।
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किराना और शराब की दुकानों पर चलाते थे नकली नोट  
जसपुर। आरोपियों से बरामद नकली करेंसी को बड़े गौर से देखने पर ही पता चल सकता है कि करेंसी नकली है। नकली करेंसी के रिबन पर आरबीआई नहीं लिखा है। पेपर क्वालिटी भी हल्की है। नोट पर बने बॉर्डर भी सही अनुपात में नहीं हैं। धंधेबाज नकली करेंसी को शराब की दुकानों, ग्रामीण क्षेत्र की किराना, दैनिक आवश्यक वस्तुओं की दुकानों पर चलाते थे। 

वर्ष 2012 में पत्नी बेटे का साथ पकड़ा जा चुका है विक्रम
जसपुर। विक्रम राय, उसके बेटे राहुल और पत्नी शिवा को आईटीआई थाना काशीपुर की पुलिस ने वर्ष 2012 में भी नकली नोटों के साथ गिरफ्तार जेल भेजा था। वहीं, आरोपी सिकंदर साहनी को थाना पठानकोट पंजाब और मनीष को थाना विस्बा सीतापुर पुलिस ने नकली नोटों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे छह वर्ष से अधिक समय से नकली नोट चला रहे हैं। विक्रम राय ने बताया कि वर्ष 2011 में गया (बिहार) से काशीपुर आते समय ट्रेन में एक व्यक्ति से उसकी मुलाकात हुई थी। उसी ने ही उसे लालच देकर इस काम में लगाया था। 

लंबे समय से चल रहा नकली नोट चलाने और बनाने का धंधा 
दिनेश कौशिक 
जसपुर। नकली करेंसी बाजार में चलाकर देश की अर्थ व्यवस्था को कमजोर करने का मामला नया नहीं है। कोतवाली क्षेत्र में नकली नोट चलाने और नकली नोट बनाने का धंधा काफी समय से चल रहा है। इस घटना से पूर्व भी कई आरोपी जेल जा चुके हैं। 
पुलिस के मुताबिक शहजाद निवासी मोहल्ला नई बस्ती, उसका साथी मोईन उर्फ दानिश निवासी मोहल्ला अल्ली खां थाना काशीपुर को कोतवाली पुलिस ने सात अक्तूबर 2017 को 10 रुपये के स्टांप पर सौ रुपये का नोट स्कैन कर नकली नोट बनाते हुए गिरफ्तार किया था।

आरोपी ग्राम रहमापुर में एक मकान किराए पर लेकर नकली नोट, फर्जी मार्कशीट, सनद आदि बनाने का काम कर रहे थे। पुलिस ने उनके पास से सौ-सौ रुपये के 408 नकली नोट, 10 रुपये के 204 नकली स्टांप पेपर, लैपटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, 25 इंक की कार्टेज बरामद की थी। आरोपी 10 रुपये के स्टांप पेपर पर नकली सौ के नोट बनाकर काफी समय से काशीपुर, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद, बाजपुर आदि स्थानों पर चला रहे थे। 

यही नहीं 26 जून 2011 को ठाकुरद्वारा मोड़ पर स्थित एक चाय की दुकान पर कोतवाली पुलिस ने छापामारी कर वाजिद अली निवासी ग्राम तुमरिया कलां, थाना डिलारी मुरादाबाद से एक-एक हजार और पांच-पांच सौ के 19-19 नकली नोट के अलावा नवाब अली निवासी महुवाडाबरा से पांच सौ के 20 नकली नोट और मोहम्मद रफी एवं गफ्फार हुसैन निवासीगण इंद्रा कॉलोनी हल्द्वानी को एक हजार के 10-10 नकली नोट बरामद कर जेल भेजा था। सभी अभियुक्तों को इस मामले में एडीजे काशीपुर की अदालत ने 10-10 वर्ष साल की सजा सुनाई थी। 
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