फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधिकारियों के कहने पर किया घोटाला

Thu, 26 Apr 2018 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  रुद्रपुर।
विज्ञापन
रुद्रपुर जिला अस्पताल में मेडिकल के बाद आरोपियों को कोर्ट ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

टीडीसी में गेहूं बीज खरीद के नाम पर हुए 20 करोड़ से अधिक के घोटाले में साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाए गए तीन कर्मचारियों मार्केटिंग अफसर ललित बोरा, लेखाकार हरिकेश बहादुर सिंह और हल्दी गोदाम के इंचार्ज छद्मी लाल को पुलिस की एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को सभी आरोपियों का जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया। कर्मचारियों के अनुसार उन्होंने अधिकारियों के कहने पर घोटाले को अंजाम दिया। अब टीडीसी के तीन बड़े अधिकारी एसआईटी की रडार पर हैं। 

विज्ञापन


2015-16 में टीडीसी में गेहूं बीज बिक्री के नाम पर 16 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आने पर टीडीसी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीके सिंह ने दस कर्मचारियों के खिलाफ पंतनगर थानेे में धारा 409 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। अगस्त 2017 में एसपी सिटी देवेंद्र पींचा के नेतृत्व में गठित एसआईटी की जांच में पुष्टि हुई कि कर्मचारियों ने किसानों के लिए तैयार बीज पर स्कीम निकालकर आटा मिल और बीज प्लांटों में खपा दिया था। करीब डेढ़ माह पूर्व एसआईटी ने कर्मचारियों के हस्ताक्षर और हस्तलेख मिलान के लिए एफएसएल देहरादून भेजे, जहां कर्मचारियों के पिछली तारीख में प्रपत्र तैयार कर घोटाला करने की पुष्टि हुई थी। 

कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के साक्ष्य मिलने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ धारा 467, 468, 471 और 120बी की बढ़ोतरी की गई है। घोटाले की जांच करने वालों में सीओ यातायात बहादुर सिंह चौहान, एसओ पंतनगर संजय पाठक, इंस्पेक्टर बलजीत सिंह भाकुनी, एसआई भुवन आर्या, एसएन तिवारी, कांस्टेबल सोनू, दान सिंह और किशोर फर्त्याल शामिल थे।
विज्ञापन



स्टोर की इश्यू बुक से हुआ खुलासा 
घोटाले में शामिल कर्मचारियों ने अप्रैल 2016 में एक इश्यू बुक स्टोर से ली लेकिन उसमें गोदाम से निकलने वाले गेहूं की एंट्री जनवरी और फरवरी में दिखाई। पिछली तारीख में इश्यू बुक की इंट्री से एसआईटी की पकड़ में सबसे पहले मामला आया और यहीं से एसआईटी को आगे की लाइन मिलती रही।  

किस पर हैं क्या आरोप 
- छद्मी लाल : टीडीसी हल्दी गोदाम इंचार्ज- वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर गेहूं बीज को गोदाम से मुजफ्फरपुर आना जाना दिखाया जबकि बीज गोदाम से न भेजा गया और न ही गोदाम में आया। 
- ललित बोरा:  मार्केटिंग अफसर - वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर बीज की एक ही दिन में कई गोदामों में सप्लाई कागजों में दिखाई जबकि बीज आया नहीं था।  
- हरिकेश बहादुर सिंह : लेखाकार - वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर पिछली तारीख  में गोदाम के खाते अपडेट किए और माल की एंट्री भी गलत दिखाई।  

स्टे खारिज होते ही होगी अधिकारियों की गिरफ्तारी 
टीडीसी बीज घोटाले में आरोपी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद अब एसआईटी अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही हैं। दस कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था इसमें एक की मौत हो गई और नौ कर्मचारियों ने अपनी गिरफ्तारी पर कोर्ट से स्टे ले लिया। इनमें तीन उच्चाधिकारी भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ एसआईटी को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए एसआईटी ने हाईकोर्ट में आवेदन किया है। स्टे खारिज होने के बाद एसआईटी इन्हें भी जेल भेजेगी। फिलहाल अधिकारी भूमिगत हो गए हैं।  
 
 स्थानीय बीज प्लांटों में भी खपाया बीज 
घोटाले में बीज को स्थानीय बीज प्लांटों में भी बेचे जाने के साक्ष्य एसआईटी को मिले हैं। साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने कुछ सीड प्लांटों को भी चिह्नित किया है। एसआईटी वितरकों से क्लेम के नाम पर हड़पे गए सवा चार करोड़ रुपये की वसूली भी करेगी। 16 करोड़ में सवार चार करोड़ को शामिल करने के बाद घोटाले की रकम 20 करोड़ से अधिक मानी जा रही है।  
विज्ञापन


कब क्या हुआ 
2015-16 में बीज घोटाला उजागर हुआ।  
आठ जुलाई 2017 को पंतनगर थाने में दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज।  
19 अगस्त को घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन।  
सितंबर में मामले की विवचेना शुरु। 
जनवरी में टीडीसी मुख्यालय से प्रथम जांच रिपोर्ट एसआईटी को मिली।   
मार्च में एसआईटी ने यूपी और बिहार के गोदामों की छानबीन की। 
मार्च में ही हस्ताक्षर और हस्तलेख मिलान के लिए एफएसएल देहरादून भेजे।  
अप्रैल में एफएसएल रिपोर्ट में मिले साक्ष्यों के आधार पर तीन लोगों की गिरफ्तारी। 
 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें