इंटरार्क फैक्ट्री के श्रमिकों को पत्नी-बच्चों और कुछ वामपंथी नेताओं के साथ त्रिपक्षीय वार्ता के लिए पहुंचना भारी पड़ गया। वार्ता के लिए महिलाओं के पहुंचने पर प्रशासन ने वार्ता से इनकार कर दिया। इससे गुस्साई महिलाओं ने हंगामा कर डीएम कार्यालय गेट पर धरना दिया। उन्हें रोकने के दौरान पुलिस कर्मियों से उनकी नोकझोंक भी हुई।
इंटरार्क बिल्डिंग प्रोडक्ट प्रा. लि. सिडकुल एवं किच्छा के श्रमिक वेतन से गैरकानूनी कटौती करके कम भुगतान का आरोप लगाते हुए पांच दिन से उप श्रमायुक्त कार्यालय पर धरना दे रहे हैं। शुक्रवार को श्रमिकों की फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन के साथ त्रिपक्षीय वार्ता होनी थी। वार्ता के लिए अपने बच्चों के साथ श्रमायुक्त कार्यालय पहुंचे श्रमिक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे।
श्रमिकों के साथ उनके परिवार के सदस्यों को देखकर उपश्रमायुक्त उम्मेद सिंह चौहान ने धरने से परिवार के सदस्यों को हटाने और वार्ता के लिए एसडीएम कार्यालय पहुंचने को कहा। यहां भी महिलाएं नारेबाजी करती हुई डीएम कार्यालय गेट पर धरने पर बैठ गईं। कुछ समय बाद डीएम ने पांच महिलाओं को ज्ञापन देने के लिए बुलाया। वहां ज्ञापन देने वालों में एक वामपंथी महिला के श्रमिकों के परिवार से न होने का पता चलने पर डीएम ने उसके बारे में पूछा, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी।
इस पर डीएम ने उक्त महिला को फटकारते हुए बाहर कर दिया। इसी बीच यह अफवाह फैल गई कि कि डीएम ने ज्ञापन लेने से मना कर दिया है और महिलाओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। कलक्ट्रेट गेट से डीएम कार्यालय में घुसने के प्रयास के दौरान महिलओं की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। वहां ममता, किरन सैनी, सविता मिश्रा, सुमन देवी, रेखा तिवारी, अखिलेश देवी, शोभा देवी, रामकली, गंगा देवी, वर्षा, मुन्नी देवी, आरती, सोनी यादव, गायत्री देवी, संजय भट्ट, दलजीत सिंह, संजीदा, हीरामती, फातमा आदि थे।
डीएम की फटकार के बाद गायब हुई वामपंथी नेता
सिडकुल के श्रमिक आंदोलनों में वामपंथी संगठनों की घुसपैठ प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। शुक्रवार को डीएम द्वारा वामपंथी संगठन की एक महिला को फटकार मारने के बाद वह अचानक गायब हो गई। एलआईयू कर्मचारी महिला के बारे में जानकारी जुटाते रहे, लेकिन महिला का पता नहीं चला।