स्वतंत्रता सेनानी की जमीन कब्जाने के मामले में रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने चकबंदी न्यायालय के एक अधिवक्ता के साथ ही जिला कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। मामले में यूपी के पूर्व विधायक और ब्लॉक प्रमुख सहित नौ लोगों के खिलाफ पूर्व में ही आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हो चुका है।
किच्छा रोड स्थित बागवाला में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम अवध सिंह को सरकार द्वारा 50 एकड़ जमीन दी गई थी। रामअवध की मौत के बाद 32 एकड़ जमीन उनकी बेटी प्रभावती के नाम हो गई थी। बची हुई शेष 18 एकड़ सीलिंग में चली गई। 32 एकड़ जमीन को बरहज यूपी के पूर्व विधायक प्रेमप्रकाश सिंह ने फर्जी वसीयत बनाकर अपने नाम कर लिया। प्रभावती की तहरीर पर वर्ष 2014 में पुलिस ने प्रेमप्रकाश सिंह, प्रेमनारायण सिंह और नवनाथ तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
साथ ही प्रेमप्रकाश सिंह की पत्नी और सितारगंज की ब्लॉक प्रमुख मंजूलता सिंह, पुत्रवधू निधि सिंह, बेटे शिव वर्धन, जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) स्वतंत्र बहादुर सिंह उनकी पत्नी गीता सिंह और पुत्रवधू शिखा सिंह के नाम पुलिस ने विवेचना में जोड़ दिए। वर्ष 2016 में पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया जिसमें वर्ष 2018 में आरोप भी तय हो गए। अक्तूबर 2018 में रुद्रपुर कोतवाली के एसएसआई कमलेश भट्ट को मामले की जांच मिली।
कमलेश भट्ट ने जांच में दोषी पाए जाने पर कुछ समय पूर्व जिला एवं सत्र न्यायालय रुद्रपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रभूषण श्रीवास्तव और चकबंदी न्यायालय रुद्रपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश पांडे के खिलाफ कोर्ट को चार्जशीट प्रेषित की जिसे बृहस्पतिवार को न्यायालय में दाखिल किया गया है।
कमलेश भट्ट ने बताया कि जांच के बाद पुष्टि हुई है कि उक्त दोनों अधिवक्ताओं द्वारा प्रभावती देवी की जमीन को पूर्व विधायक प्रेम प्रकाश के नाम पर कराने के लिए चकबंदी न्यायालय में फर्जी महिलाओं को प्रभावती और उनकी बेटी इंदू बनाकर पेश किया गया था। जिसके आधार पर दोनों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया है।