इलाज के अभाव में भाजपा नेता ने दम तोड़ दिया। इससे आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा काटा और डाक्टर के खिलाफ रोष जताया। आरोप लगाया कि डाक्टर की लापरवाही से भाजपा नेता की मौत हुई। घंटे भर तक वह इंजेक्शन के लिए तड़पते रहे। लेकिन, डाक्टर ने मेडिकल से दवा मंगाने के चक्कर में अस्पताल में इंजेक्शन होने के बाद भी नहीं लगाया।
बुधवार देर रात करीब दो बजे वार्ड संख्या दो निवासी भाजपा नेता जमील अहमद (55) की सांस फूलने लगी। परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां डाक्टर ने अस्पताल से दवा व इंजेक्शन देने के बजाय मेडिकल से दवाई लिख दी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद घंटे भर तक जमील इंजेक्शन के लिए तड़पते रहे।
उन्होंने डॉक्टर से इंजेक्शन लगाने को भी कहा। लेकिन, डाक्टर ने अस्पताल में इंजेक्शन होने के बाद भी नहीं लगाया और न ही कोई दवा दी। तत्काल इलाज न होने से सांस घुटने के कारण उनकी मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया और परिजनों ने वार्डवासियों के साथ अस्पताल में ही डाक्टर के खिलाफ आक्रोश जताते हुए हंगामा शुरु कर दिया।
चिकित्साधिकारी डा. हर्ष सिंह ऐरी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिजनों व वार्डवासियों से बात की। उन्होंने अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दवाइयां चेक की तो डाक्टर द्वारा मेडिकल से लिखे गए गए इंजेक्शन मौजूद थे। इस पर उन्होंने डाक्टर की गलती स्वीकार की।
परिजनों ने चिकित्साधिकारी से तत्काल ही आरोपी डाक्टर को हटाने की मांग की। सुबह करीब चार बजे परिजन जमील के शव को घर ले आए। वहां पर व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जिलानी अंसारी, मजहर अहमद मुन्ना, रिहान अहमद, रजी अहमद, छोटा अंसारी आदि थे।
कमीशन के चक्कर में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
एक तो सुविधाएं नहीं, ऊपर से कमीशनखोरी। सरकारी अस्पताल की हालत डाक्टरों ने बद से बदतर कर दी है। इमरजेंसी में मरीज को सरकारी अस्पताल ले जाना अब जान मुसीबत में डालने से कम नहीं है। अस्पताल के डाक्टर दवाई न होने की बात कहकर कमीशन के चक्कर में मेडिकलों से दवा मंगा रहे हैं।
इसका खुलासा भाजपा नेता की मौत के बाद हुआ। डाक्टर ने पर्चे पर जो इंजेक्शन लिखे थे, वो सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में उपलब्ध थे। बावजूद इसके डाक्टर ने मेडिकल से इंजेक्शन मंगाए और तब तक मरीज ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
शासन की उपेक्षा के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ रेफर सेंटर बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल में दवाइयां तो उपलब्ध कराई जा रही हैं। लेकिन, डाक्टरों की कमी बरकरार है। वर्तमान में चिकित्साधिकारी समेत सिर्फ दो डाक्टर ही अस्पताल चला रहे हैं। वो भी मेडिकल स्टोरों के रहमो करम पर।
अस्पताल में पर्याप्त दवाई होने के बाद भी डाक्टर मरीजों को दवा नहीं देते और पर्चे पर मेडिकल से दवाई लिख दी जाती है। बुधवार की मध्य रात भाजपा नेता जमील अहमद जब परिजनों के साथ सीएचसी पहुंचे तो उन्होंने डाक्टर से सांस को कंट्रोल करने के लिए तुरंत ही इंजेक्शन लगाने को कहा।
लेकिन, डाक्टर ने इंजेक्शन न होने की बात कहते हुए मेडिकल से इंजेक्शन और दवाई लिख दी। और, जब चिकित्साधिकारी डा. हर्ष सिंह ऐरी आए तो इमरजेंसी वार्ड की ट्रे से इंजेक्शन निकालकर आरोपी डाक्टर को दिखाए भी। अगर, डाक्टरों का मेडिकल स्टोर से दवाई लिखने का सिस्टम बंद नहीं हुआ तो इस तरह आगे भी मरीज अपनी जान गंवाते रहेंगे। नगरवासियों ने इस मामले में स्वास्थ्य निदेशक व स्वास्थ्य मंत्री से कार्रवाई करने और आरोपी डाक्टर को तत्काल बर्खास्त किए जाने की मांग भी की है।
डाक्टर की गलती है। जब अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध हैं तो मरीज के क्यों नहीं लगाए। मेडिकल से दवाई नहीं लिखना चाहिए। मरीज की हालत अगर सीरियस है तो उसे हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाए। मामले की जांच करेंगे।
डा. हर्ष सिंह ऐरी-चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सितारगंज
जमील की मौत हार्ट अटैक से हुई है। अस्पताल जब लेकर आए तो जमील सांस फूलने से बेचैन था। इसी बीच उसे हार्ट अटैक हो गया। जिससे उसकी मौत हो गई।
जेसी शंखधर-चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सितारगंज।