एक ही परिसर में दो से तीन राइस मिलों के संचालन पर जांच की तलवार लटक गई है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के डिप्टी आरएमओ वेदप्रकाश धूलिया ने राइस मिलों की प्रमाणिकता की जांच के लिए वीडियोग्राफी कराई। इससे मिल मालिकों में खलबली मची है।
अक्तूबर में सरकारी धान खरीद केंद्रों के साथ ही राइस मिलों के आवंटन के लिए डीएम ने राइस मिल मालिकों से नौ बिंदुओं की रिपोर्ट पर शपथ पत्र मांगे थे। इस मामले को अमर उजाला ने दस अक्तूबर के अंक में ‘शपथ पत्र में गलत जानकारी दी तो नपेंगे राइस मिलर’ शीर्षक से अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों और राइस मिल मालिकों में हड़कंप मचा है।
एसएमआई रेवाधर ने बताया डीएम द्वारा मांगी गई नौ बिंदुओं की रिपोर्ट पर आरएमओ वेदप्रकाश धूलिया ने टीम के साथ आरएस एग्रो इंडस्ट्रीज, तराई इंडस्ट्रीज, बालाजी इंडस्ट्रीज, गोविंद ट्रेडर्स और राम-श्याम सीड्स मिल का निरीक्षण किया और वहां संयंत्र और परिसर की वीडियोग्राफी कराई, जिसमें मिलों के कागजात, अक्षांतर, देशांतर, रजिस्ट्री, खतौनी, फड़ और गोदाम आदि चेक किए। बताया कि आठ राइस मिलों की तो चौहद्दी ही एक पाई गई है। एसएमआई ने बताया एक ही परिसर में दो से तीन मिल संचालन फर्जी मिलने पर राइस मिलरों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
आटा मिल और बीज संयंत्र की आड़ में दर्शाई चावल मिलें
जिले में कई व्यापारियों ने आटा मिल और बीज संयंत्र की आड़ में राइस मिलें दिखा रखी हैं। मामला संज्ञान में आया तो डीएम ने शपथ पत्र मांग लिए, जिस पर गत वर्ष 43 मिलों के स्थान पर इस बार 37 मिलों को ही कोड आवंटित हुए हैं। चार राइस मिलरों ने तो कोड के लिए आवेदन ही नहीं किया।
पिछले साल तक क्षेत्र की 43 राइस मिलों को कोड आवंटित हुए थे। कई लोगों ने अपनी आटा मिल और बीज संयंत्र की आड़ में राइस मिलें दिखा रखी हैं। अमर उजाला द्वारा मामला उठाने के बाद अक्तूबर में डीएम ने राइस मिलों की प्रमाणिकता जांचने के लिए सभी नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांग ली। इस पर 43 में से 37 राइस मिल मालिकों को तो विभाग द्वारा कोड जारी कर दिए गए। आठ मिलों की चौहद्दी एक मिलने पर उनकी वीडियोग्राफी कराई। एसएमआई रेवाधर ने बताया कि उत्तरांचल ट्रेडर्स, नरेश ट्रेडिंग कंपनी, कृष्णा ट्रेडर्स और श्री कार्तिक इंडस्ट्रीज ने मिल के कोड के लिए आवेदन ही नहीं किया।
मिल मालिक ने दी सफाई
कोड के लिए आवेदन न करने वाली राइस मिल श्री कार्तिक इंडस्ट्रीज के मालिक वेदप्रकाश अग्रवाल ने बताया वे तीन भाई (वेदप्रकाश, सुरेश चंद्र और नरेश चंद्र) हैं, जिनके नाम तीन राइस मिलें और दो बीज संयंत्र हैं, जो बिज्टी रोड पर श्री कार्तिक इंडस्ट्रीज, बालाजी इंडस्ट्रीज व ओम इंडस्ट्रीज और ओम तराई सीड्स व बालाजी सीड के नाम से हैं। इनमें श्री कार्तिक इंडस्ट्रीज वर्ष 2011 में लगाई थी। बताया कि बिजली का बिल अधिक होने और सरकार की गलत नीतियों के कारण वह श्री कार्तिक इंडस्ट्रीज को बंद कर रहे हैं, जिस कारण कोड के लिए आवेदन नहीं किया।
फड़िया हटाने के बाद हो रही खरीद
सरकारी धान क्रय केंद्रों पर विभाग द्वारा पूरी तरह से साफ-सुथरे धान की खरीद कराई जा रही है। किसान केंद्र पर कई-कई दिन धान सुखाने के बाद पंखे से फड़िया (हल्का धान) हटाने में लगे हैं। बृहस्पतिवार को एसएमआई के सरकारी क्रय केंद्र पर बिथा अकबर गांव निवासी हरभजन सिंह व अजमेर सिंह धान बेचने पहुंचे। यहां केंद्र प्रभारी ने पंखे से उनका धान सहलवाया और फिर सारा फड़िया (बिना चावल का हल्का धान) निकाल साफ-सुथराकर उसे खरीदा। केंद्रों पर धान सुखाने और फिर पंखों से फड़िया निकलवाने में किसानों को मजदूर भी लगाने पड़ रहे हैं, जिससे धान बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।