रुद्रपुर। प्रदेश के एकमात्र मैदानी जिले ऊधमसिंह नगर में जलवायु परिवर्तन के कारण प्रमुख मटर की खेती प्रभावित हो रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण मटर की बुवाई का समय एक माह आगे खिसक गया है। वर्तमान तापमान में अगर मटर की बुवाई होगी तो जमाव तो होगा पर न फसल में बढ़ाव होगा और न ही फल निकलेंगे।
मटर की फसल के लिए 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के मध्य का तापमान आदर्श माना जाता है। इसमें बीज जमाव के लिए 13 डिग्री से 18 डिग्री तापमान सबसे अच्छा होता है। इस तापमान तक पौधे में विकास अच्छा होता है। मगर, इधर जलवायु परिवर्तन के कारण जिले का तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। प्रदेश में मटर की फसल के लिए ऊधमसिंह नगर कभी उत्पादक जिले के रूप में शुमार था। बड़े पैमाने पर किसान मटर की खेती करते थे पर आज अभी तक जिले में इसकी शुरूआत ही नहीं हो पाई है। विशेषज्ञ प्रभाकर सिंह ने बताया कि पहले सितंबर में बड़े पैमाने पर मटर की बुवाई शुरू हो जाती थी पर अब तापमान बढ़ने से अक्तूबर मध्य के बाद शुरू हो रही है। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ता है।
पहले मध्य सितंबर हुआ करता था मुफीद समय
उद्यानीकरण के जानकारों की मानें तो एक दशक पूर्व सितंबर के मध्य से जिले में मटर की खेती की बड़े पैमाने पर शुरूआत हो जाती थी। मटर की फसल लगाने के लिए किसान खेत में धान नहीं लगाते थे। आज आलम यह है कि एक तो तापमान गर्म है, दूसरा किसानों ने भी खेत में धान की फसल लगा रखी है। अब मटर की बुवाई का आदर्श तापमान आने तक अक्तूबर मध्य का समय निकल जाएगा। तब तक धान की कटाई का भी समय हो जाएगा। अधिकतर किसान धान की फसल काटकर ही मटर लगाएंगे।
रकबा बढ़ाने का रिवाइवल प्लान नहीं
जिले में प्रत्येक वर्ष करीब 3500 हेक्टेयर खेतों में मटर की खेती होती थी। बीते वर्ष पहली बार जिला प्रशासन ने जिले में गर्मी वाले धान पर पूर्णतया रोक लगा दी। इसका असर मटर की खेती पर भी पड़ा और मटर का रकबा करीब 1500 हेक्टेयर घट गया। इस वर्ष जबकि मटर की बुवाई शुरू होने वाली है, उधर उद्यान विभाग के पास जिले में रकबा बढ़ाने का कोई रिवाइवल प्लान नहीं है।