पिछले साल हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
एनएच 74 घोटाले में दिनेश प्रताप सिंह सहित दस आरोपियों ने पिछले साल हाईकोर्ट में निचली अदालत की ओर से ईडी को अलग-अलग शिकायतों पर केस दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश को गलत करार दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश के सही ठहराते हुए याचिका को निरस्त कर दिया था।
सांठगांठ से हड़पा गया था करोड़ों का मुआवजा
एनएच घोटाले में मुआवजे की मोटी रकम के लिए कागजों में खेल किए गए थे। अफसर, कर्मचारी, दलालाें और किसानों ने सांठगांठ से कृषि भूमि को बैक डेट में अकृषि दर्शाया था। इससे मिले करोड़ों के मुआवजे से कमीशन की बंदरबांट हुई थी। इस घोटाले में चुकटी देवरिया स्थित टोल प्लाजा के शिफ्टिंग का खेल भी हुआ था। राज्य गठन के बाद पहली बार पांच पीसीएस अफसरों को जेल जाना पड़ा था।
मुख्य आरोपी बेदाग तो दूसरे आरोपियों पर चलेगा केस
एनएच घोटाले में एसआईटी की ओर से मुख्य आरोपी बनाए गए दिनेश प्रताप सिंह को शासन से क्लीन चिट और अभियोजन की अनुमति निरस्त होने के बाद बड़ा सवाल उपज रहा है। इस घोटाले में चार अन्य पीसीएस अफसरों के साथ ही अधिकारी, कर्मचारी और किसान आरोपी हैं। जब मुख्य आरोपी को क्लीन चिट मिल चुकी है तो इसको बाकी अफसर भी आधार बना सकते हैं। हालांकि कानून के जानकार मान रहे हैं कि घोटाले में इस तरह की क्लीन चिट देने का निर्णय अपने आप में अनूठा था।