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Rudrapur: एनएच- 74 घोटाले के मुख्य आरोपी डीपी सिंह को शासन से क्लीन चिट, दो IAS और PCS अफसर किए गए थे निलंबित

Fri, 14 Jun 2024 03:03 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

एनएच 74 मुआवजा घोटाला अजब फैसले से सुर्खियों में आ गया है। शासन ने इस घोटाले में नामित जांच अधिकारी की जांच आख्या के आधार पर मुख्य आरोपी पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह को सभी आरोपों पर क्लीन चिट दे दी है।
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NH-74 scam - फोटो : अमर उजाला
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देशभर में सुर्खियों में रहे एनएच 74 मुआवजा घोटाला अजब फैसले से सुर्खियों में आ गया है। शासन ने इस घोटाले में नामित जांच अधिकारी की जांच आख्या के आधार पर मुख्य आरोपी पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह को सभी आरोपों पर क्लीन चिट दे दी है। यही नहीं उनके खिलाफ चल रही अनुशासनिक कार्यवाही को बिना किसी दंड अधिरोपण के खत्म कर दिया गया है। साथ ही न्यायालय में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की पूर्व में दी गई अनुमति को भी निरस्त कर दिया गया है।

मार्च 2017 को तत्कालीन कमिश्नर डॉ. सेंथिल पांडियन ने करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। तत्कालीन एडीएम प्रताप शाह ने सिडकुल चौकी में एनएचएआई के अधिकारी, कर्मचारियों के साथ ही सात तहसीलों के तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। इस घोटाले में दो आईएएस और पांच पीसीएस अफसर निलंबित किए गए। 30 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी, दलाल और किसानों को जेल जाना पड़ा था।
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एसआईटी ने तत्कालीन एसएलओ और पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह को मुख्य आरोपी बनाया था। करीब 14 महीने तक डीपी सिंह को जेल में रहना पड़ा था। इस घोटाले में ईडी और आयकर विभाग भी सक्रिय हुआ था। अधिकारियों और किसानों की करोड़ों रुपयों की संपत्ति को अटैच किया गया। एसआईटी की ओर से वर्ष 2019 में घोटाले की चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई। एसआईटी की जांच में 400 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ था। यह मामला अदालत में विचाराधीन है।

इधर शासन ने 25 जनवरी 2024 को इस मामले में जांच अधिकारी नामित किया था। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर घोटाले के मुख्य आरोपी बनाए गए पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से 12 अप्रैल को इसका आदेश भी जारी किया जा चुका है। इसके साथ ही 17 जनवरी 2018 को शासन की ओर से न्यायालय में डीपी सिंह के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति को निरस्त कर दिया है। इधर संयुक्त निदेशक विधि की ओर से भी भ्रष्टाचार अधिनियम कोर्ट को भी अवगत करा दिया गया है।
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पिछले साल हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
एनएच 74 घोटाले में दिनेश प्रताप सिंह सहित दस आरोपियों ने पिछले साल हाईकोर्ट में निचली अदालत की ओर से ईडी को अलग-अलग शिकायतों पर केस दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश को गलत करार दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश के सही ठहराते हुए याचिका को निरस्त कर दिया था। 

सांठगांठ से हड़पा गया था करोड़ों का मुआवजा
एनएच घोटाले में मुआवजे की मोटी रकम के लिए कागजों में खेल किए गए थे। अफसर, कर्मचारी, दलालाें और किसानों ने सांठगांठ से कृषि भूमि को बैक डेट में अकृषि दर्शाया था। इससे मिले करोड़ों के मुआवजे से कमीशन की बंदरबांट हुई थी। इस घोटाले में चुकटी देवरिया स्थित टोल प्लाजा के शिफ्टिंग का खेल भी हुआ था। राज्य गठन के बाद पहली बार पांच पीसीएस अफसरों को जेल जाना पड़ा था। 

मुख्य आरोपी बेदाग तो दूसरे आरोपियों पर चलेगा केस
एनएच घोटाले में एसआईटी की ओर से मुख्य आरोपी बनाए गए दिनेश प्रताप सिंह को शासन से क्लीन चिट और अभियोजन की अनुमति निरस्त होने के बाद बड़ा सवाल उपज रहा है। इस घोटाले में चार अन्य पीसीएस अफसरों के साथ ही अधिकारी, कर्मचारी और किसान आरोपी हैं। जब मुख्य आरोपी को क्लीन चिट मिल चुकी है तो इसको बाकी अफसर भी आधार बना सकते हैं। हालांकि कानून के जानकार मान रहे हैं कि घोटाले में इस तरह की क्लीन चिट देने का निर्णय अपने आप में अनूठा था। 

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