काशीपुर जीजीआईसी में दरी पर बैठी छात्राएं।
काशीपुर। सरकारी स्कूलों में बेहतर व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग कितना संजीदा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बालिकाएं जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। डिमांड भेजने के बाद भी विभाग सुध लेने को तैयार नहीं है। महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की भी छात्राएं पढ़ती हैं। इसमें कक्षा एक से 12वीं तक करीब 1700 से अधिक छात्राएं पंजीकृत हैं और करीब ढाई सौ छात्राएं प्रवेश के लिए प्रतिक्षा में लगी हुई हैं।
विद्यालय में 28 कक्ष हैं। आलम यह है कि एक कक्ष में 100 से अधिक छात्राएं बैठ रही हैं। कक्ष छोटे होने के कारण प्रथम तल पर कक्षा 11 ए और बी, कक्षा 12 ए व बी की छात्राओं को दरी पर बैठना पड़ रहा है, जबकि फर्नीचर उपलब्ध है। नई शिक्षा नीति के तहत एक कक्ष में 40 छात्राएं बैठ सकती हैं। मानक के अनुसार विद्यालय में 10 कक्षों का निर्माण होना अति आवश्यक है। बार-बार डिमांड भेजने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इसका खामियाजा छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।
पीएम श्री में शामिल फिर भी सुविधाओं का अभाव
काशीपुर। जीजीआईसी की स्थापना 1956 में हुई थी। इस विद्यालय को दो साल पहले पीएम श्री योजना में भी शामिल किया गया। लेकिन व्यवस्थाओं में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। आलम यह है कि बरसात के दौरान पुराने भवन के बरामदे पर पानी टपकता है। इससे पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होता है। वहीं जून के अवकाश में दो कक्षों की मरम्मत कर भौतिक और रसायन विज्ञान की लैब का निर्माण होना है। इसका जिम्मा पेयजल निर्माण को सौंपा गया है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी, यूएस नगर, कुंवर सिंह रावत ने बताया कि काशीपुर जीजीआईसी में क्षमता से अधिक छात्राएं बैठने का मामला संज्ञान में है। इस समस्या को देखते हुए पुराने छोटे जीजीआईसी को शुरू किया जाएगा या इसी परिसर में अतिरिक्त कक्ष बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही निरीक्षण किया जाएगा।