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यूपी से अलग करने के गलत निर्णय ने टीडीसी को पहुंचाया नुकसान : उनियाल

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पंतनगर में हुई टीडीसी की आम सभा में बोलते कृषि मंत्री और मंचासीन अतिथि। - फोटो : RUDRAPUR
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कृषि मंत्री और टीडीसी के चेयरमैन सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम (टीडीसी) को यूपी बीज निगम से अलग करना बड़ी भूल थी। इस गलत निर्णय ने टीडीसी को बहुत नुकसान पहुंचाया था। यूपी सरकार से टीडीसी को यूपी में मिलाने और रोटेशन के आधार पर एक बार यूपी और एक बार उत्तराखंड का चेयरमैन बनाने को लेकर बात कही थी लेकिन इसमें देरी हो गई थी।
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बृहस्पतिवार को जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गांधी हाल में टीडीसी के 47, 48वीं वार्षिक आमसभा में कृषि मंत्री ने कहा कि जब तक अशंधारी किसान नए व्यावसायिक दृष्टिकोण नहीं अपनाएंगे तब तक तो किसान और न ही निगम का भला होगा। निगम के शेयर होल्डर होने का मतलब इसका मालिक आप लोग हैं। इसलिए आप का हित निगम के हित से जुड़ा हुआ है। अधिकारी तो आज है और कल चले जाएंगे।
कहा कि कृषि विभाग टीडीसी से ही बीजों की खरीद करेगा, इसके आदेश हो गए हैं। टीडीसी की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए बीजों की गुणवत्ता एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण आवश्यक है। इसके तहत अदरक, हल्दी, आलू, आदि सब्जियों के संकर बीजों का उत्पादन और विपणन करना होगा। सब्जियों का बीज मांग के अनुरूप उद्यान विभाग खरीदेगा। उन्होंने अंशधारकों से टीडीसी प्रबंधन पर विश्वास कर अपना सकारात्मक सहयोग बनाए रखने की अपील की।
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राष्ट्रीय बीज निगम के सीएमडी डॉ. वीके गौड़ ने बताया कि हल्दी, अदरक और कई सब्जियां कर्नाटक और आलू हिमाचल प्रदेश से आ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सब आसानी से उगाया जा सकता है। उन्होंने अंशधारी किसानों से समय की मांग समझते हुए धान, गेहूं के साथ सब्जियों, मसालों के बीज भी उत्पादित करने की सलाह दी। विधायक राजेश शुक्ला ने टीडीसी कर्मियों का लंबित दो माह का वेतन जारी होने की बात कही।
निदेशक शोध डॉ. एएस नैन ने टीडीसी की प्रगति में विश्वविद्यालय की ओर से सहयोग करने की बात कही। डीएम और टीडीसी एमडी रंजना राजगुरू ने निगम का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस दौरान किसानों के सवालों का हल भी सुझाया गया। कार्यक्रम का संचालन मुख्य बीज उत्पादन अधिकारी डॉ. दीपक पांडे ने किया। वहां पर महाप्रबंधक डॉ. अभय सक्सेना, विवि के सीजीएम फार्म डॉ. डीके सिंह, अमित पुरोहित, मुकुल महेश्वरी, अंकुर पपनेजा, समरपाल सिंह, प्रतिपाल आदि थे।
तीन वर्षों से जुड़े किसानों को लॉयल्टी बोनस
पंतनगर। कृषि मंत्री ने कहा जो किसान टीडीसी के उन्नत बीज उत्पादन कार्यक्रम में विगत तीन वर्षों से जुड़े हुए हैं, उन्हें लॉयल्टी बोनस दिया जाएगा। इसके साथ ही टीडीसी के कर्मचारियों और अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप बीज अंतग्रहण कराने पर बोनस का प्रावधान भी किया जाएगा। उन्होंने पंतनगर विवि का अस्तित्व बचाने के लिए इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की भी हिमायत की। कहा कि इसके लिए पुरजोर कोशिश होनी चाहिए। (संवाद)
मछलियां फंसीं, मगरमच्छ बच निकले
पंतनगर। टीडीसी में हुए 16 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र करते हुए कृषि मंत्री ने चुटकी ली कि मछलियां तो फंस गई लेकिन बड़े मगरमच्छ बच निकले। कहा कि जैसे ही मामला मेरे संज्ञान में आया था मैंने तत्काल मुकदमा दर्ज करने और एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। तब इससे जुड़े प्रदेश एक बड़े राजनेता ने मुझे फोन कर मामले को दबाने और घोटाले से जुड़े एक अधिकारी को बचाने की सिफारिश की थी। घोटालेबाजों की गिरफ्तारी से जहां अधिकारियों में सख्त संदेश गया, वहीं अंशधारी किसानों के चेहरे खिले थे। (संवाद)
कांग्रेसियों ने सीएम, कृषि मंत्री और विधायक के खिलाफ लगाए नारे
पंतनगर। टीडीसी की आमसभा में पहुंचे कृषि मंत्री को प्रदेश महामंत्री हरीश पनेरू के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने गांधी हॉल के बाहर ही रोक लिया। उन्होंने विवि की भूमि पर प्रस्तावित एयरपोर्ट के विरोध में चलाए जा रहे अभियान को सहमति देते हुए हस्ताक्षर करने की मांग की। कृषि मंत्री के मना करने पर पनेरू ने टीडीसी की हालत सुधारने व कर्मियों को समय से वेतन देने और पंतनगर विवि के ठेका कर्मियों को उपनल समान वेतन देने संबंधी ज्ञापन सौंपा।
इसके बाद कांग्रेसियों ने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री व क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। इसे नजरअंदाज कर कृषि मंत्री कार्यक्रम में शिरकत करने चले गए। वहीं कृषि मंत्री को विधायक राजेश शुक्ला ने भी ज्ञापन सौंपकर पंतनगर विवि के ठेका कर्मियों की आठ प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी और टीडीसी के नियोजित कर्मियों को मंडी समिति से निकालने के विरोध करते हुए पुनर्नियोजित करने का ज्ञापन सौंपा। (संवाद)
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