लॉकडाउन के चलते टैक्सी कारोबारी किस्त तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। कई कारोबारी काम बदलने का भी मन बना चुके हैं।
एआरटीओ कार्यालय में 116 टैक्सी पंजीकृत हैं। सामान्य दिनों में टैक्सी संचालकों का धंधा खूब फल फूल रहा था।
25 मार्च से कोरोना के चलते देश में लॉकडाउन किया गया था। तीन महीने बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लोगों को लॉकडाउन से राहत तो मिली लेकिन प्रतिदिन कोरोना मरीजों की बढ़ती तादाद के कारण टैक्सी कारोबारियों की समस्या बरकार है। टैक्सी कारोबारियों को किस्त जमा करने तक के पैसे नहीं है। लॉकडाउन की बढ़ती सीमा के कारण कई कारोबारी दूसरा धंधा करने का मन बना चुके हैं।
नवंबर 2018 में एक कार बैंक से फाइनेंस कराई थी। लॉकडाउन के दौरान तीन महीने में जिले के भीतर की ही 3-4 बुकिंग मिली हैं। बैंक की तीन किस्तें जमा नहीं हो सकीं। जमा पूंजी से ही घर का खर्च चलाना पड़ रहा है। अब वह भी समाप्त होने को है।
-विजेंद्र सिंह, टैक्सी संचालक, बरखेड़ा पांडे
वर्ष 2017 में एक कार बैंक से फाइनेंस कराई थी। तीन महीने में इक्का-दुक्का ही बुकिंग मिली है। गाड़ी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। किराना दुकान सहित अन्य कार्यों के लिए करीब पचास हजार रुपये का कर्ज हो चुका है। बैंक की किस्त जमा करने के लिए बैंक लगातार फोन कर रहा है। लॉकडाउन जल्द समाप्त नहीं होता है तो कोई और काम करेंगे।
-इंद्राज, टैक्सी संचालक, बैलजूड़ी
दो कार बैंक से फाइनेंस कराई थीं। जमा पूंजी से ही किस्त भर रहे हैं। एक टैक्सी चालक नौकरी छोड़कर जा चुका है। दूसरे को हजार-दो हजार रुपये देकर काम चला रहे हैं। टैक्सी कारोबार बुरी तरह प्रभावित है। कोरोना महामारी के कारण लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
-परमजीत सिंह, टैक्सी संचालक, गोपीपुरा