रुद्रपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश बुनियादी ढांचों की कमी के बीच दम तोड़ती नजर आ रही है। प्राथमिक विद्यालयों के पास पर्याप्त फर्नीचर होने बावजूद उसे रखने की व्यवस्था नहीं है। कई विद्यालयों में बेंच-टेबल होने के बावजूद विद्यार्थियों को दरी पर बैठकर पढ़ाई करनी पढ़ रही है।
शिक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में विद्यालयों के लिए फर्नीचर का बजट उपलब्ध कराया गया था। कई स्कूलों तक फर्नीचर पहुंचाया भी गया। जरूरत से अधिक फर्नीचर होने और जगह की कमी के कारण करीब 25 लाख रुपये का फर्नीचर स्कूलों से वापस लौटाया गया। विद्यालयों में कमरों की संख्या और छात्रसंख्या के बीच असंतुलन के कारण परेशानी बढ़ रही है। कई जगह एक ही कक्ष में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाया जाता है। ऐसे में बेंच-डेस्क लगाने से बच्चों के बैठने की जगह सीमित हो सकती है। कुछ स्कूलों में सीलन और जर्जर कमरों की समस्या भी पढ़ाई के माहौल को प्रभावित कर रही है। ऐसे में विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण, पुराने भवनों की मरम्मत और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर ध्यान देना जरूरी है।
बीते वर्ष सभी स्कूलों में जरूरत के अनुसार फर्नीचर उपलब्ध कराया जा चुका है। कई विद्यालयों में फर्नीचर रखने की व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण परेशानी हो रही है। इसके जल्द समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। हरेंद्र कुमार मिश्रा, सीईओ