(राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष)
- कोरोना महामारी में रुद्रपुर कॉलेज के सहायक प्रोफेसर ने डिजायन की थी राज्य की पहली वर्चुअल लैब
कीर्तिराज रुमाल
रुद्रपुर। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से रुद्रपुर के सरदार भगत सिंह डिग्री कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. भारत पांडेय की ओर से तैयार की गई राज्य की पहली वर्चुअल लैब का इस्तेमाल आज भारत के साथ ही विदेशों के लाखों विद्यार्थी कर रहे हैं। इस वर्चुअल लैब का एक बार में 5000 विद्यार्थी इस्तेेमाल कर सकते हैं। इस वुर्चअल लैब के लिंक htt://sbsgpgc.virtuality.org.in पर क्लिक कर छात्र-छात्राएं रसायन विज्ञान के प्रैक्टिकल कर घर बैठे कर सकते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान ऑफलाइन पढ़ाई न हो पाने के कारण बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाया गया। प्रैक्टिकल ऑनलाइन नहीं हो पा रहे थे, सबसे अधिक समस्या रसायन विज्ञान के प्रैक्टिकल को लेकर आ रही थी। इस समस्या को देखते हुए आईआईटी दिल्ली के सहयोग से राज्य की पहली वर्चुअल लैब बनाने की तैयारी शुरू हुई थी। इसके लिए रुद्रपुर डिग्री कॉलेज को वर्चुअल लैब का नोडल सेंटर बनाया गया। साथ ही वर्चुअल लैब की डिजाइन की जिम्मेदारी रुद्रपुर डिग्री कॉलेज के रसायन विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. भारत पांंडेय को मिली। उन्होंने अप्रैल 2022 तक डिजाइन के साथ ही वर्चुअल लैब बनाकर तैयार कर दी। सबसे पहले इस वर्चुअल लैब का लिंक रुद्रपुर कॉलेज की वेबसाइट पर अपलोड किया। जिसके बाद बीएससी और एमएससी के छात्र-छात्राओं ने घर बैठे रसायन विज्ञान के प्रैक्टिकल किए। धीरे-धीरे विभिन्न शोध छात्रों और केमिकल कंपनियां भी इसका इस्तेमाल करने लगीं। वर्तमान में इस वर्चुअल लैब की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि भारत के साथ ही विदेशों के छात्र-छात्राएं भी इस वर्चुअल लैब का इस्तेमाल करने लगे हैं।
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कोट-
मेरा सौभाग्य है कि मुझे वर्चुअल लैब का डिजाइन बनाने का मौका मिला। आज इस वर्चुअल का इस्तेेमाल देश-विदेश में एक साथ 5000 बच्चे कर रहे हैं। वर्चुअल लैब बनाने के लिए आईटीआई दिल्ली, आईटीआई रुड़की, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात, ओमान समेत कई विदेशों के कॉलेजों की ओर से सराहना मिली है। केमिकल कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का व्यावसायिक प्रशिक्षण भी इस लैब के माध्यम से निशुल्क प्राप्त किया जा रहा हैं।
- डॉ. भारत पांडेय, सहायक प्रोफेसर, रुद्रपुर डिग्री कॉलेज।