रुद्रपुर। सरकारी महकमों की सुस्ती के चलते जिले में दो साल पहले चिह्नित किए गए 769 बाल श्रमिकों का स्कूलों में आज तक दाखिला नहीं हो पाया है। ऐसे में चिह्नित किए गए कई बाल श्रमिक अब बालिग की श्रेणी में आ चुके होंगे।
नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट के तहत जिले में ढाबों, रेहड़ी और ठेलियों में काम करने वाले बाल श्रमिकों को कुमाऊं सेवा समिति की चाइल्ड लाइन टीम ने वर्ष 2018 दिसंबर में चिह्नित किया था। टीम ने श्रम विभाग को 21 जनवरी वर्ष 2019 में सर्वे रिपोर्ट सौंप दी थी। इसमें छह से 14 वर्ष तक 369 व 15 से 18 वर्ष तक 400 बाल श्रमिक चिह्नित किए गए थे।
एनसीएलपी के तहत जिले में बाल श्रमिकों को मुक्त कर उनका स्कूलों में दाखिला कराना था। साथ ही स्कूल में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों को प्रत्येक माह 400 रुपये वजीफा भी दिया जाना था। लेकिन सरकार की सुस्ती के चलते योजना धरी की धरी रह गई।
हैरानी की बात तो यह है कि रुद्रपुर स्थित जिस सड़क पर उपश्रमायुक्त कार्यालय है, वहीं छोटे बच्चे साइकिलों व मोटर मेकेनिक की दुकानों पर काम कर रहे हैं। सर्वे के दौरान जिले में सबसे अधिक बाल श्रम रुद्रपुर ब्लॉक में देखा गया है। रुद्रपुर में सबसे अधिक 336 बाल श्रमिक चिह्नित हैं। उपश्रमायुक्त विपिन कुमार ने बताया कि चिह्नित किए गए बाल श्रमिकों की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप दी गई थी।
वर्ष 2018 में चिह्नित किए गए बाल श्रमिक
ब्लॉक- 6-14 वर्ष आयु - 15 से 18 वर्ष आयु
रुद्रपुर 180 156
काशीपुर 26 26
बाजपुर 28 32
जसपुर 26 23
गदरपुर 34 54
सितारगंज 39 58
खटीमा 36 51
कुल 369 400
कोरोना संक्रमण के चलते चिह्नित बच्चों का दाखिला स्कूलों में नहीं हो पाया। बच्चों की उम्र के हिसाब से बेसिक या माध्यमिक स्कूलों में उन्हें पढ़ाया जाएगा। स्कूल खुलने पर स्थिति ठीक हुई तो उन्हें दाखिला दिया जाएगा। - आरसी आर्या, मुख्य शिक्षा अधिकारी।