रुद्रपुर। मजदूरी की अनिश्चितता से जूझ रहे एक परिवार की किस्मत बाइक रिपेयरिंग के एक छोटे से उद्यम ने बदल दी। बाजपुर के बढ़ियावाला गांव की उजमा ने ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से जुड़कर न सिर्फ अपने परिवार को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए मिसाल पेश की है।
उजमा के पति इरशाद हुसैन पहले मजदूरी कर परिवार चलाते थे। आय नियमित न होने से घर चलाना मुश्किल था। इसी दौरान आईफैड वित्तपोषित ग्रामोत्थान परियोजना की टीम ने गांव में सर्वे किया और उजमा को नॉन फार्म इंटरप्राइजेज के तहत उद्यम लगाने का प्रस्ताव दिया। 23 अगस्त 2025 को 1.50 लाख की लागत से बाइक रिपेयरिंग की दुकान शुरू हुई जिसमें 75 हजार रुपये परियोजना ने और 75 हजार रुपये परिवार ने लगाए।
इस सहयोग से जरूरी औजार और सामान खरीदे गए और इरशाद ने खुद का काम शुरू किया। आज यह दुकान परिवार की स्थायी आजीविका बन गई है। पहले जहां मजदूरी पर निर्भरता थी वहीं अब हर महीने 18 से 21 हजार रुपये की बचत हो रही है। अब तक इस उद्यम से 1.20 लाख रुपये की आय और 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ परिवार कमा चुका है। उजमा कहती हैं, कल तक मजदूरी ही सहारा थी, आज अपने हुनर से हम आत्मनिर्भर हैं।