केबिनेट की संस्तुति मिलने के बाद राज्यपाल ने उत्तराखंड जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था (संशोधन) अध्यादेश 2016 पर अनुमति प्रदान कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी। टैगोर नगर में आयोजित समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा ने कहा यह क्षेत्रवासियों की पिछले 50 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विधानसभा उपचुनाव में किया गया भूमिधरी का मुख्य वायदा आज पूरा हो गया है। उन्होंने शासनादेश की प्रतियां लोगों को वितरित की। तहसीलदार आरसी गौतम ने शुल्क की जानकारी देते हुए लोगों से भूमिधरी के लिए आवेदन करने की अपील की।
टैगोरनगर दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में सौरभ ने कहा कि उप चुनाव के दौरान उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने यहां के लोगों की दो प्रमुख मांग सिरसा मोटरमार्ग व भूमिधरी अधिकार को लागू करने का वायदा किया था। 65 करोड़ की लागत से सिरसा मोटरमार्ग का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मुख्यमंत्री रहते हुए विजय बहुगुणा ने जनवरी 2014 में भूमिधरी के लिए पहला शासनादेश लागू किया था। परंतु इसके लिए शुल्क की अंतिम रूपरेखा नहीं बनने से इसे लागू नहीं किया जा सका। अब जमीन के सर्किल रेट के आधार पर पांच फीसदी शुल्क तय कर कैबिनेट से संस्तुति के बाद राज्यपाल की अनुमति से अध्यादेश का रूप दिया गया। उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार से पारित पहला अध्यादेश है। इससे सिर्फ शक्तिफार्म ही नहीं वरन उत्तराखंड में रहने वाले पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर आए परिवारों को इसका लाभ मिलेगा।
इससे पूर्व लोगों ने भूमिधरी का शासनादेश लागू होने पर बहुगुणा परिवार का आभार जताते हुए सौरभ का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर मंडी अध्यक्ष अमरजीत सिंह कटवाल, नगर पंचायत चेयरमैन सुकांत ब्रहम, गुरजीत सिंह, रविंद्रनाथ सरकार, संजय सरकार, सुरेश सरकार, आन सिंह रावत, सुबल मंडल, प्रभाकर राय, कालीपद महलदार, शीतल दे, उदय राणा, धीमान सेन, ब्रिंची बाइन, उत्तम शील, पिंटू मुखर्जी, सुबल विश्वास, अशोक विश्वास, दीपक सरकार, मंगल सिंह, सुखरंजन शील आदि थे।
अलग श्रेणी की जमीन के लिए भूमिधरी शुल्क अलग-अलग
तहसीलदार आरसी गौतम ने भूमिधरी के लिए अध्यादेश जारी होने की जानकारी देते हुए अलग-अलग श्रेणी की जमीनों के लिए अलग-अलग शुल्क जमा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि बंगाली शरणार्थियों को आवंटित जमीनों को मुख्यत: चार श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी के तहत वो मूल पट्टाधारक जिन्होंने वर्ष 2013 में अपनी जमीन के वर्ग 9 में दर्ज कराया था। ऐसे पट्टाधारकों को भूमिधरी के लिए किसी प्रकार का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है। दूसरी श्रेणी में मूल पट्टाधारक या उनके उत्तराधिकारी 9 नवंबर 2000 को लागू सर्किल रेट का पांच फीसदी शुल्क जमा कर अपनी संक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पा सकते हैं। इसके लिए करीब 5 से 6 हजार प्रति एकड़ की दर से शुल्क जमा कराना होगा। तीसरी श्रेणी में वो लोग जिन्होंने मूल पट्टाधारक की सहमति से जमीन खरीद कर उसमें काबिज हैं। उन्हें सितंबर 2005 में लागू सर्किल रेट का पांच फीसदी शुल्क जमा कराना होगा। ये शुल्क भी करीब पांच हजार से लेकर 16 हजार रुपये प्रति एकड़ तक है। चौथी श्रेणी में वो कब्जेदार है, जिसपर मूल पट्टाधारक की सहमति नहीं है। उन्हें सितंबर 2010 में लागू सर्किल रेट का पांच फीसदी जमा कराना होगा। यह शुल्क भी करीब 13 हजार से लेकर 67 हजार रूपये प्रति एकड़ है। तहसीलदार गौतम ने 20 फरवरी से इसकी प्रक्रिया आरंभ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शुल्क को दो किस्तों में जमा करने की भी सुविधा प्रदान की गई है।
मेरे त्याग की बदौलत मिला भूमिधरी अधिकार : मंडल
शक्तिफार्म। भूमिधरी लागू होने की औपचारिक जानकारी देने के लिए आयोजित समारोह में आमंत्रित नहीं किए जाने से आहत कुमाऊं मंडल विकास निगम अध्यक्ष किरन मंडल ने कहा कि उनके त्याग की बदौलत ही भूमिधरी अधिकार लागू हो पाया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत व राज्य सरकार बधाई के पात्र हैं। मंडल ने कहा कि भूमिधरी लागू होने का वास्तविक श्रेय मुझे ही मिलना चाहिए। कहा कि इस बात को पूर्व सीएम विजय बहुगुणा को भी स्वीकार करना चाहिए कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी दिलाने व सरकार बचाने में मेरे बलिदान का ही सर्वोपरि योगदान रहा है। मंडल ने कहा कि क्षेत्रीय जनता इस बात को भलीभांति जानती है।