बाजपुर। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल न्यायाधीश परीक्षा 2022 की लिखित परीक्षा का परिणाम सोमवार को घोषित हुआ। बाजपुर निवासी गुंजन सिसौदिया और ज्योति सिंह कश्यप का सिविल जज जूनियर डिविजन के पद पर चयन होने पर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई।
लिखित परीक्षा पांच दिसंबर 2023 को आयोजित की गई थी। सेंट मेरी अस्पताल के पास रहने वाली गुंजन सिसौदिया और नगर मोहल्ला रामभवन निवासी ज्योति सिंह कश्यप ने सफलता हासिल की है। 30 अप्रैल को सिसौदिया और कश्यप का साक्षात्कार परीक्षा हुई थी। छह मई को परिणाम घोषित हुआ। जिसमें गुंजन सिसौदिया नौंवी रैंक तो ज्योति सिंह कश्यप 16वीं रैंक हासिल करके सिविल न्यायाधीश बने। गुंजन सिसौदिया ने बताया कि उनका यह पांचवा प्रयास था। वर्ष 2014 में गुंजन अधिवक्ता बनी थीं। गुंजन व कश्यप के जज बनने पर बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, अधिवक्ता विजय गर्ग, उदय सिसौदिया, समाज सेवी अरूण शर्मा, राजकुमार चंद्रा आदि ने बधाई दी।
बाजपुर बार एसोसिएशन की संयुक्त सचिव हैं गुंजन
बाजपुर। गुंजन सिसौदिया ने कहा कि उसे पांचवीं बार कामयाबी मिली। कोशिश करने वालों को सफलता जरूर मिलती है। गुंजन सिसौदिया के पिता शशिकांत सिसौदिया बाजपुर गन्ना विकास सहकारी समिति के कर्मचारी थे। पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता सूतीक्षणा सिसौदिया को गन्ना सहकारी समिति में नौकरी मिल गई। जबकि भाई उदय सिसौदिया प्राइवेट नौकरी करते हैं। गुंजन की शिक्षा दीक्षा बीसीएसएफ इंटर कॉलेज और जीजीआईसी बाजपुर से हुई। नोएडा से एलएलबी करने के बाद गुंजन वर्तमान में बाजपुर बार एसोसिएशन की संयुक्त सचिव हैं। संवाद
तीसरी बार के प्रयास में मिली सफलता
बाजपुर। फोटो फ्रेमिंग का कार्य करने वाले हीरा लाल कश्यप का बेटा ज्योति सिंह कश्यप के परिवार में खुशी की लहर है। कश्यप ने कहा कि जीवन में कोई भी काम असंभव नहीं है। कश्यप की शिक्षा बाजपुर इंटर कॉलेज, काशीपुर डिग्री कॉलेज और देहरादून से हुई। कश्यप ने वर्ष 2010 में अल्मोड़ा से एलएलबी करने के बाद प्रैक्टिस करने के बजाये जज बनने की तैयारी शुरू की। इलाहाबाद से कोचिंग हासिल की। आईएमटी काशीपुर में सहायक प्रोफेसर के रूप में तीन साल सेवाए दी। वह पीएचडी भी कर रहे हैं। कश्यप वर्तमान में हरिद्वार जिला न्यायालय में सहायक अभियोजन अधिकारी के पद तैनात हैं। उन्होंने सफलता कर श्रेय माता रामवती, पिता हीरा लाल और गुरुजनों को दिया। उन्होंने तीसरी बार परीक्षा में सफलता मिली है।