काशीपुर। हत्या के एक आरोपी ने खुद को नाबालिग साबित कर जमानत हासिल करने की कोशिश की। कोर्ट में सुनवाई के दाैरान दस्तावेजों ने खुद हेराफेरी की पोल खोल दी। दिलचस्प बात यह कि आधार कार्ड में उसका जन्म वर्ष 2001 में होना दर्शाया गया है जबकि आरोपी ने दूसरे दस्तावेज दिखाकर दावा किया कि उसके मां बाप की शादी वर्ष 2008 में हुई और वह वर्ष 2010 में पैदा हुआ। अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए गहन जांच के आदेश दिए और जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
जसपुर के मोहल्ला नई बस्ती के अरमान अली की 31 मार्च 2025 को हत्या कर दी गर्द थी। इस मामले का आरोपी मो. समीर जेल में बंद है। उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में दावा किया कि घटना के समय वह नाबालिग था। उसका तर्क था कि उसकी जन्मतिथि 26 जून 2010 है और वारदात के दिन उसकी उम्र मात्र 14 वर्ष 9 माह 5 दिन थी। अपने दावे के समर्थन में समीर ने नगर पालिका परिषद जसपुर के जन्म-मृत्यु रजिस्टर का रिकॉर्ड पेश किया। उसमें जन्मतिथि 26 जून 2010 दर्ज थी। साथ ही यह भी कहा गया कि उसके माता-पिता की शादी अगस्त 2008 में हुई थी इसलिए 2010 में जन्म होना स्वाभाविक है। आरोप लगाया कि पुलिस ने गलत तरीके से बालिग दिखाया है।
दस्तावेज की यह हेराफेरी कानून के कटघरे में ज्यादा देर न टिक सकी। अदालत में पेश किए गए आधार कार्ड और पैन कार्ड ने पूरी कहानी पलट दी। इन दोनों दस्तावेजों में आरोपी की जन्मतिथि 1 जनवरी 2001 दर्ज पाई गई। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि समीर 2021-22 में कुवैत में काम करने जा चुका है जो उसके नाबालिग होने के दावे पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश रीतेश कुमार श्रीवास्तव ने सभी दस्तावेजों पर बारीकी से गौर करने के बाद आरोपी का प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
उच्चस्तरीय जांच होगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय देहरादून और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर को इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
आरोपी ने अलग-अलग जन्मतिथि वाले दस्तावेज बनवाकर न्याय प्रशासन, कानून और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने की कोशिश की है।
-अदालत की टिप्पणी