आयुर्वेदिक अस्पताल में 15 मरीजों का हो चुका सफल इलाज इंफो 10 से अधिक मरीज एक महीने में आ रहे अस्पताल
रुद्रपुर। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म की शिरोधरा विधि से हुए इलाज से मरीजों को माइग्रेन के चुभन भरे दर्द से निजात मिल रही है। अब तक शिरोधारा विधि से इलाज कराकर 15 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में हर महीने 10 से अधिक माइग्रेन के मरीज आ रहे हैं।
आयुर्वेदिक शिरोधारा एक तरह से थकान और तनाव दूर करने की आयुर्वेदिक विधि है। इस विशेष पद्धति में तेल को इंसान के सिर पर एक विशेष गति के साथ डाला जाता है। जिन्हें मानसिक तनाव रहता है, उनके लिए यह विधि बहुत फायदेमंद होती है।
एक विशेष क्षीरबला के तेल से सात से 15 दिन में मरीज को राहत मिल जाती है। शिरोधारा विधि से 20 से 60 साल की आयु के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
उपचार की विधि शिरोधारा विधि से इलाज के लिए मरीज को पीठ के बल लिटाया जाता है। उसके बाद उड़द की दाल से बने आटे की लेई कोे भांओ की ऊपरी तरफ लगाया जाता है, जिससे माथे पर गिरने वाला तेल आंखों पर ना जाए। उसके बाद ऊपर लटके घड़ेनुमा धातु के बर्तन की नोजल से क्षीरबाला तेल की धार मरीज के माथे पर गिराई जाती है। दूध, तिल के तेल व बाला के पौधों को पका कर क्षीरबला का तेल तैयार किया जाता है। माथे पर गिरने वाला तेल नीचे एक द्रोणी पर इक्ट्ठा किया जाता है। यह प्रकिया दो घंटे तक दोहराई जाती है। संवाद
कारण
व्यावहारिक, घरेलू और व्यावसायिक कारणों से होने वाला मानसिक तनाव माइग्रेन की मुख्य वजह है। अधिक शोर की जगह पर काम करने और बिना आराम के निरंतर काम करने से भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है। कोविड काल के बाद बढ़ते तनाव के कारण मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
बचाव
- अधिक गर्मी में जाने से बचें। गर्मी में माइग्रेन की समस्या बढ़ने लगती है। सुबह समय से उठ कर रोजाना शवआसन करना चाहिए। प्राकृतिक वातावरण में अधिक से अधिक समय बिताएं। बेवजह का तनाव लेने से बचें।
महंगे क्षीरबला तेल के दाम
आयुर्वेदिक अस्पताल में क्षीरबला तेल की सप्लाई नहीं होती है जिसके चलते मरीजों को खुद ही बाहर से तेल खरीदकर लाना पड़ता है। क्षीरबला तेल बाजार में 2500 से 3000 रुपये लीटर मिलता है। महंगे तेल के कारण कई मरीज इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं। पूरे इलाज के लिए तीन से पांच लीटर तेल की आवश्यकता पड़ती है। कोट: पंचकर्म की शिरोधारा विधि से मरीजों को काफी राहत मिलती है। जानकारी के अभाव में कम मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। समय से इलाज कराने पर मरीज को पूर्ण रूप से राहत मिलती है। निजी अस्पतालों में लाखों रुपये में होने वाला इलाज जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में मुफ्त में किया जा रहा है। - डॉ. राकेश कुमार, आयुर्वेदिक चिकित्सक