रुद्रपुर। मलीहाबाद (लखनऊ) में चार से छह जुलाई तक आयोजित आम महोत्सव में उत्तराखंड के आम ने अपनी खास पहचान बनाई। आम की चार प्रजातियों को पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें अरुणिमा और पूसा श्रेष्ठ प्रजाति को द्वितीय जबकि कृषभोग और नाजुक बदन प्रजाति के आम को तृतीय पुरस्कार मिला।
फलों के राजा आम की नगरी के रूप में विख्यात मलीहाबाद में आम महोत्सव में सभी प्रदेशों के बेहतरीन आम के अलग-अलग स्टॉल लगाए गए थे। इसमें उत्तराखंड के प्रत्येक जिलों से आम की खेप पहुंची थी। तीन दिन तक चले महोत्सव में सबसे अच्छे आम के स्टॉल को पुरस्कार से नवाजा गया। इसमें उत्तराखंड की तरफ से अरुणिमा और पूसा श्रेष्ठ प्रजाति को द्वितीय पुरस्कार मिला। इसके अलावा कृषभोग और नाजुक बदन प्रजाति के आम को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अरुणिमा प्रजाति की विशेषता
अरुणिमा आम, आम्रपाली और सेंसेशन किस्मों के संकरण से विकसित एक रंगीन और देर से पकने वाली किस्म है। इसके फल बड़े आकार के 250 ग्राम तक वजन वाले लालिमा लिए आकर्षक और मध्यम मीठे होते हैं। यह विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होता है।
नाजुक बदन की खासियत
आम की नाजुक बदन प्रजाति, जिसे ''''अल्फांसो'''' के नाम से भी जाना जाता है, अपनी विशेष विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। यह फल मध्यम से बड़े आकार का होता है, पकने पर आकर्षक पीला रंग और एक खास सुगंध होती है। इसका गूदा मलाईदार और रेशे रहित होता है, जो इसे खाने में बहुत स्वादिष्ट बनाता है।
महोत्सव में इन आमों के लगे था स्टॉल
दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आमपाली, बांबेग्रीन, मल्लिका, रामकेला, जरदालू, अंबिका, पुष्पा लालिमा, पूसा श्रेष्ठ, पितांबर, अरुणिका, अरुणिमा, बनारसी, रेटाल, प्रतिभा, केसर, अर्का किरण, सूर्या, गुलाब खास, गौरजीत, अल्फांसो, कृषभोग और नाजुक बदन।
कोट
लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव में उत्तराखंड के आम की चार प्रजातियों को पुरस्कार मिलने से काफी खुशी है। इसमें दो प्रजातियों को द्वितीय और दो को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। - प्रभाकर सिंह, नोडल उत्तराखंड