तराई में गन्ना मूल्य भुगतान में देरी और लगातार बंद होती सहकारी चीनी मिलों से किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग हो रहा है। चालू वर्ष में तराई में गन्ने का कुल रकबा सिर्फ 30,763 हेक्टेयर रह गया है। पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब एक हजार हेक्टेयर रकबा कम हुआ है। राज्य गठन के बाद करीब पचास फीसदी रकबा कम हुआ है।
ऊधम सिंह नगर जिले में औद्योगिकीकरण और कृषि भूमि के अकृषि होने से गन्ने की खेती काफी प्रभावित हुई है। गन्ने के उत्पादन कम होने से वर्ष 2012 में काशीपुर और 2015 में गदरपुर सहकारी चीनी मिल के बंद हो चुकी हैं। अब सितारगंज चीनी मिल के बंद होने से तराई में गन्ने का उत्पादन अधिक प्रभावित होने की आशंका है। पिछले वर्ष ऊधमसिंह नगर में 31,222 हेक्टेयर गन्ना उगाया गया था। इस वर्ष जिले में 30,763 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया। गन्ना उत्पादन में आगे रहने वाले सितारगंज क्षेत्र में इस वर्ष 8283 हेक्टेयर गन्ना बोया गया।
जबकि पिछले वर्ष 8983 हेक्टेयर गन्ना बोया गया था। वर्ष 2002-03 में दो करोड़, 60 लाख, 98 हजार क्विंटल गन्ने की आपूर्ति हुई थी। जबकि पिछले वर्ष तक घटकर यह आपूर्ति 98 हजार क्विंटल तक पहुंच गई। इस वर्ष यह आंकड़ा और नीचे जा जा सकता है। तराई किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तजेंद्र सिंह विर्क कहते हैं कि सरकार तराई की उपजाऊ जमीन से खेती को खत्म करने की साजिश रच रही हैं। ताकि यहां भी कंक्रीट का जंगल उगाया अरबों-खरबों की कमाई की जाये। राज्य गठन के समय करीब 60 हेक्टेयर भूमि में गन्ना बोया जाता था। किसानों की लगातार उपेक्षा से अब गन्ने का रकबा आधा हो गया है।
उपलब्ध गन्ने से जिले में गन्ना आपूर्ति के लिए पूरे प्रयास किये जा रहे हैं। सितारगंज और खटीमा की गन्ना समितियों के लिए केंद्र चालू कर दिए गए हैं। गन्ना किच्छा और बाजपुर चीनी मिलों को दिया जा रहा है।
धर्मवीर सिंह, सहायक गन्ना आयुक्त
जिले में वर्ष 2016-17 में गन्ने का रकबा (हेक्टेयर में)
ब्लॉक रकबा
जसपुर 4675.6
काशीपुर 3151.2
बाजपुर 4941.1
गदरपुर 630.7
किच्छा 8240.4
सितारगंज 8983.4
जिले में वर्ष 2017-18 में गन्ने का रकबा (हेक्टेयर में)
जसपुर 5047.0
काशीपुर 3313.4
बाजपुर 4641.7
गदरपुर 690.9
किच्छा 8821.2
सितारगंज 8283.5