काशीपुर। सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के स्वास्थ्य विभाग के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में कुत्ता-बिल्ली के काटने पर लगाए जाने वाली एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की किल्लत बनी है। मरीज मेडिकल से महंगी वैक्सीन खरीदकर अस्पताल में लगवाने के लिए मजबूर हैं।एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में रोज 500 से 600 ओपीडी होती हैं। इनमें रोज 100 से अधिक मरीज कुत्ते के काटे के पहुंच रहे हैं लेकिन एक महीने से सरकारी अस्पताल में एआरवी समाप्त हो चुकी है। मरीज इंजेक्शन कक्ष में पूछकर लौट रहे हैं और मेडिकल से महंगी वैक्सीन खरीदकर अस्पताल में ही कर्मचारी से लगवा रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
इससे पहले अक्तूबर में एआरवी समाप्त होने के बाद समस्या खड़ी हो गई थी। अल्ली खां निवासी रियाज ने बताया कि कुत्ते ने पैर में काट लिया था। अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने के लिए आए थे। कर्मचारी ने वैक्सीन नहीं होने की बात कर वापस लौटा दिया।
ग्राम खरमासा निवासी देवकी ने बताया कि अस्पताल में एआरवी इंजेक्शन नहीं मिला है। मेडिकल से खरीदकर वैक्सीन लगवाई है। सीएमएस संदीप दीक्षित ने बताया कि मुख्यालय से एआरवी नहीं आ रही है। चयनित एजेंसी ने भी मना कर दिया है।
कोट:
मुख्यालय स्तर पर एआरवी के लिए एक कंपनी से अनुबंध हुआ है। नमूना जांच के लिए गया हुआ है। स्थानीय खरीद के लिए सीएमएस को निर्देश दिए गए हैं। -केके अग्रवाल, सीएमओ, ऊधमसिंह नगर