काशीपुर। श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम एवं समापन दिवस पर कथा के व्यास अमित मोहन ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता द्वापरयुग से लेकर कलियुग तक प्रासंगिक है। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र का भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया।
बुधवार को श्री गंगे बाबा मंदिर उदासीन आश्रम प्रांगण में एक मई से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम एवं समापन दिवस पर श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा के व्यास अमित मोहन ने कहा कि कलियुग में लोगों को भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से सीख लेनी चाहिए। क्योंकि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ थी। वहीं हरिनाम संकीर्तन एवं आशीर्वचन व्यास के श्रीमुख से श्रद्धालुओं ने नाच गाकर पूरे पंडाल को भक्तिरस से भर दिया। कथा के आयोजक अभिनव अग्रवाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे से हवन यज्ञ किया जाएगा एवं एकादशी उद्यापन के उपरांत भंडारे का प्रसाद वितरण किया जाएगा।