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किसान दंपती की संतान ने संभाली परिवार की विरासत

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रुद्रपुर के बिगवाड़ा स्थित अपने खेतों में काम करते किसान अमृतपाल सिंह - फोटो : RUDRAPUR
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युवा किसान अमृतपाल सिंह के लिए खेती सिर्फ जीविकोपार्जन का जरिया नहीं है, खेती के साथ उनकी गहरी भावनाएं भी जुड़ी हैं। आज जब तराई के लोग खेतों को बेचकर कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बस रहे हैं, वहीं अमृतपाल अपने परिवार की खेती की परंपरा को बचा रहे हैं।
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बिगवाड़ा निवासी युवा किसान अमृतपाल बताते हैं कि उनका जन्म यहीं हुआ। उन्होंने बचपन से ही पिता रजवंत सिंह और माता गुरमीत कौर को खेती करते देखा। करीब 20 वर्ष पहले पिता के निधन के बाद उन्होंने खेती-बाड़ी में माता का हाथ बढ़ाया। इसके बाद से वह लगातार खेती कर रहे हैं। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के गाजीपुर सीमा से लेकर कई जगह किसान आंदोलन में शामिल रहे अमृतपाल कहते हैं कि ऊधम सिंह नगर खेती के लिहाज से उत्तराखंड का प्रमुख जिला है।
सरकार को किसान बहुल इस जिले को कंक्रीट के जंगल के रूप में विकसित करने के बजाय कृषि के क्षेत्र में देशभर में विशेष पहचान दिलवाने के प्रयास करने चाहिए। किसानों के सामने आ रही चुनौतियों को खत्म करने के प्रयास करने चाहिए। बताते हैं कि खेती की लागत बढ़ने के कारण कई युवाओं का इससे मोहभंग हो रहा है। यह चिंताजनक है। सरकार को युवाओं को खेती से जोड़ने के प्रोत्साहित करना चाहिए। महिला किसानों के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी विशेष योजनाएं चलनी चाहिए।
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