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Udham Singh Nagar News: मुनाफे की मंडी में माैत का साैदा, लालच के तराजू में बिक गया जीवन

Sun, 01 Feb 2026 01:27 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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किच्छा में पिट्ठू बैग में छुपाकर ले जा रहे थे 91 कछुए, यूपी से लाकर रुद्रपुर में बेचने की थी तैयारी, दो महिलाओं समेत चार तस्कर गिरफ्तारसंवाद न्यूज एजेंसी
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किच्छा। इंसानी लालच जब हदें पार करता है तो प्रकृति की सांसें घुटने लगती हैं। ऐसा ही एक दृश्य शनिवार सुबह पुलभट्टा क्षेत्र में सामने आया, जब पिट्ठू बैगों में बंद 91 कछुए मुनाफे की मंडी में कटने के लिए ले जाए जा रहे थे। समय रहते पुलभट्टा पुलिस की कार्रवाई ने इन बेजुबान जिंदगियों को मौत के सौदे से बचा लिया। पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार तस्करों को गिरफ्तार कर कछुओं को मुक्त कराया है।
शनिवार सुबह एसआई दिनेश भट्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम बरेली मुख्य मार्ग पर ग्राम सुतईया के पास गश्त कर रही थी। इसी दौरान दो महिला और दो पुरुष पिट्ठू बैग लिए संदिग्ध हालत में खड़े नजर आए। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर जब बैगों की तलाशी ली गई तो उनमें जिंदा कछुए मिले। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे इटावा (यूपी) से इन्हें खरीदकर रुद्रपुर में किसी व्यक्ति को सौंपने जा रहे थे, जहां इन्हें काटकर एक हजार रुपये किलो के हिसाब से बेचने की तैयारी थी।
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पुलिस के अनुसार, ओमा पत्नी महिपाल के दो बैगों से 38 कछुए बरामद हुए जबकि 19 वर्षीय कामनी पत्नी दीपू के बैग से 18 कछुए मिले। वहीं इटावा निवासी विष्णु और सनी के बैगों से क्रमशः 17 और 18 कछुए बरामद किए गए। सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
कोट

कछुओं की तस्करी संगठित तरीके से की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह खेप रुद्रपुर में खपाने की योजना थी। मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके। -उत्तम सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक

कछुओं की तस्करी क्यों
कछुए और उनके अंडे खाने और दवाओं के लिए ऊंचे दामों पर बिकते हैं। अंधविश्वास में इनके खून, खोल को ताकत, लंबी उम्र और यौन क्षमता बढ़ाने वाला माना जाता है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। कुछ जगहों पर तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका, शुभ मान्यताओं के नाम पर कछुओं की अवैध खरीद-फरोख्त होती है। कुछ प्रजातियों के कछुए एक्वेरियम, घरों में पालतू रखने के लिए भी तस्करी किए जाते हैं। कछुए नदी-तालाब की प्राकृतिक सफाई करते हैं। इनके खत्म होने से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ता है। कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं।
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क्या कहता है कानून

-कछुओं का शिकार, पकड़ना, बेचना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गंभीर अपराध है।

-अधिकांश कछुआ प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में हैं।

-तस्करी पर 7 साल तक की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है।
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