रुद्रपुर। केंद्र सरकार द्वारा जारी नई दवा नीति के विरोध में दवा व्यवसायी एकजुट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि शेडयूल एच-1 में 46 मौलीक्यूल शामिल किए गए है। नई दवा नीति के तहत दवा व्यवसायियों को दवाइयों का विवरण, डॉक्टर के पर्चे से लेकर मरीजों का नाम, पता, फोन नंबर समेत अन्य जानकारियां भी रखनी होंगी। केंद्र सरकार द्वारा जारी की जाने वाले नई दवा नीति (शेडयूल एच-1) के विरोध में शुक्रवार को जिले के एक हजार मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। दवा व्यवसायियों ने इस कानून को वापस न लेने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
केमिस्ट एंड ड्रग्स्टि एसोसिएशन रुद्रपुर के अध्यक्ष समीर चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2010 में शेडयूल एचएस आया था। जिसमें 274 मौलीक्यूल शामिल किए गए थे। जिसमें डाक्टर का पर्चा होना जरूरी था। जिसका विरोध कर देश के सभी सांसदों को पत्र लिखा गया। विरोध के चलते मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 31 अगस्त 2013 को शेडयूल एच-1 की अधिसूचना जारी कर दी गई। जिसका विरोध किया जा रहा है।
आवास विकास स्थित जुनेजा मेडिकल स्टोर के स्वामी पुनीत जुनेजा ने कहा कि शेडयूल एच-1 एक काला कानून है। जिससे केमिस्टों का उत्पीड़न होगा है।
मुख्य बाजार स्थित बल्देव मेडिकल स्टोर के गुरशरन जीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार एच-1 शेडयूल लागू कर रही है। इसके तहत बिना पर्चे के दवा नहीं बेची जा सकती। साथ ही डॉक्टर के पर्चे की फोटो कॉपी, ग्राहक का नाम, पता, टेलीफोन नंबर रखना आवश्यक है। जिसमें एक ग्राहक को निपटाने के लिए एक घंटा चाहिए।
हुड़िया मेडिकल स्टोर के स्वामी राजकुमार हुड़िया ने कहा कि सरकार दवा व्यवसायियों का उत्पीड़न करने में जुटी है। नारकोटिक्स ड्रग्स एवं साइकोट्रोपिक सब्सटांस (एनडीपीसीडी) की दवाओं को बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लाया जा रहा है। जिसे निरस्त होना चाहिए। प्रियंका मेडिकल स्टोर के संजीव कामरा ने बताया कि नई दवा नीति के विरोध में देश में सभी दवा व्यवसायी एकजुट हैं। उत्तरांचल औषधि व्यवसायी संघ के आह्वान पर नई दवा नीति के विरोध में शुक्रवार को कारोबार बंद रखा जाएगा।